सीयूईटी UG 2026 में परीक्षा केंद्र आवंटन में कमी: कई छात्र अब बदलते शहरों पर मजबूर
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने आज CUET UG 2026 के लिए शहर पुनः आवंटन की विंडो फिर से खोल दी। यह कदम उन अभ्यर्थियों के लिए है जिन्हें प्राथमिक रूप से चुने गये केंद्रों में सीटों की कमियों के कारण अपना पसंदीदा शहर नहीं मिल पाया।
आवंटन प्रक्रिया ‘पहले आए, पहले पाए’ के आधार पर चलती है, जिससे समय पर आवेदन नहीं करने वाले छात्रों को फिर से उनके विकल्पों का पुनः मूल्यांकन करना पड़ेगा। यह व्यवस्था तेज़ी से कार्यवाही की माँग करती है, लेकिन वास्तविकता में यह डिजिटल साक्षरता, इंटरनेट कनेक्टिविटी, और सूचना तक पहुँच में असमानताओं को उजागर करती है, विशेषकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए।
कुल मिलाकर अधिकांश अभ्यर्थियों ने अपनी इच्छित शहर प्राप्त कर ली, परंतु एक छोटा‑सा वर्ग अब वैकल्पिक केंद्रों को स्वीकार करने के लिए मजबूर है। यह स्थिति इस प्रश्न को उठाती है कि कितनी बार परीक्षाओं की योजना बनाने में वास्तविक क्षमता का अनुमान लगाया जाता है, और क्या इससे सामाजिक-शैक्षिक असमानता को बढ़ावा नहीं मिलता।
नियामकीय दृष्टिकोण से यह देखना दिलचस्प है कि वही संस्था, जो राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के मानक स्थापित करती है, अपनी ही प्रक्रियाओं में ‘सीटों की गिनती’ के लिए गणित की कक्षा से बाहर निकल गई। अगर प्रारम्भिक चरण में ही अधिक सटीक क्षमता‑आधारित मॉडल अपनाया जाता, तो पुनः आवंटन की इस विघटित प्रक्रिया से बचा जा सकता था।
आगे की कार्रवाई के लिए NTA ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे अपने एडमिट कार्ड में दर्शाए गए सभी विवरणों की पुष्टि कर शीघ्र ही उपलब्ध विकल्पों को चुनें। सरकारी पहल के बावजूद, इस पुनः आवंटन के दौरान प्रशासनिक तत्परता और डिजिटल साक्षरता में अंतर स्पष्ट रूप से सामने आया है, जो संकेत देता है कि भविष्य की बड़ी-स्तरीय परीक्षाओं में समावेशी नीति निर्माताओं के लिए अभी काफी राह बाकी है।
Published: May 6, 2026