सीबीएसई कक्षा 10 के दूसरे बोर्ड परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी, छात्रों को बढ़ती असमानता का सामना
भारत में शिक्षा का बड़ा भाग्य शैक्षणिक कैलेंडर से तय होता है, और इस बार केंद्रीय बोर्ड ने दो-चरणीय बोर्ड परीक्षा के लिए दूसरा एडमिट कार्ड जारी कर दिया है। 15 से 21 मई 2026 तक आयोजित होने वाली इस परीक्षा में 6.6 लाख छात्र कंपार्टमेंट, सुधार या दोनों के लिए पंजीकृत हैं। जबकि नियमित छात्रों को उनके विद्यालयों से हार्ड कॉपी मिलती है, निजी उम्मीदवारों को ऑनलाइन डाउनलोड करना पड़ता है।
डिजिटल सुविधा का सवाल यहाँ से शुरू होता है। ऑनलाइन हॉल टिकट डाउनलोड करने के लिये स्थिर इंटरनेट, उपयुक्त डिवाइस और तकनीकी समझ आवश्यक है—परंतु ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों में यह शर्त अक्सर लापता रहती है। कई स्कूलों ने बताया कि एडमिट कार्ड की घोषणा के बाद से ही प्रिंटेड कॉपी की कमी और डाउनलोड सर्वर में लोड का बोझ छात्रों में अनावश्यक तनाव पैदा कर रहा है। यही वह असमानता है, जिसे नीति‑निर्माताओं ने ‘समान अवसर’ का बैनर फहराते हुए भी अनदेखा कर दिया।
पर्याप्त समय की कमी भी प्रशासनिक योजना में एक बड़ी खामि को उजागर करती है। पहला चरण का एडमिट कार्ड अभी‑अभी जारी हुआ, जबकि दूसरे चरण की तैयारी केवल दो हफ्ते में पूरी करनी है। इस तंगी का लाभ उठाकर कुछ राज्य‑स्तर की एजेंसियों ने वैकल्पिक केंद्रों की व्यवस्था करने का दावा किया, परन्तु ठोस कार्यान्वयन रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आया है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या परीक्षा‑केन्द्रों की क्षमता, ट्रांसपोर्ट और सुरक्षा प्रबंधन को सही समय पर तैयार किया गया है या फिर यह केवल कागज़ी जाँच है।
नीति‑परिवर्तन की बात करें तो बोर्ड ने यह तय किया है कि दोनो परीक्षाओं में से अधिकतम अंक ही अंतिम परिणाम में गिना जाएगा। यह अभिप्राय छात्रों को दोहरा मौका देकर सहयोग करने का है, परन्तु वास्तविकता में यह दोहराव वाली परीक्षा की तैयारी के लिए अतिरिक्त खर्च, समय और मानसिक दबाव की चुनौतियाँ पेश करता है। विशेषकर उन परिवारों के लिए जो पहले से ही आर्थिक तंगी में जी रहे हैं, यह दोहरा बोझ भारी पड़ता है।
सार्वजनिक जवाबदेही की मांग अब तक सूखी व्यंग्यात्मक टिप्पणी से अधिक बन गई है। केंद्र और राज्य स्तर के शिक्षा विभागों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि एडमिट कार्ड वितरण की देरी किस कारण से हुई, डिजिटल डेलिवरी के लिए क्या बैक‑अप व्यवस्था है, तथा ग्रामीण‑शहरी अंतर को पाटने के लिए किन ठोस कदमों की योजना है। तभी यह कहा जा सकेगा कि यह बॉर्ड परीक्षा सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि शिक्षा प्रणाली की असमानताओं का एक प्रतिबिंब है, जिसे सुधार की सख्त जरूरत है।
Published: May 5, 2026