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Category: समाज

संदीप पिचाई की जलमग्न शांति ने भारत में कार्यस्थल कल्याण नीति को मोड़ दिया

गूगल के सीईओ संदीप पिचाई ने हाल ही में एक जलदर्शी यात्रा के दौरान "दुनिया का सबसे शांत स्थान" खोजा, जहाँ उन्हें शांति — और साथ‑साथ नेतृत्व के नए सिद्धांत — मिले। यह निजी अनुभव सोशल मीडिया पर फैलते ही भारतीय तकनीकी उद्योग में एक बड़े प्रश्न को उजागर कर गया: तनाव‑ग्रस्त आईटी कर्मचारियों के लिये कार्यस्थल में मानसिक स्वास्थ्य की व्यवस्था कितनी ठोस है?

भारत में प्रतिदिन लाखों तकनीकी पेशेवर लंबे घंटे, रात‑रात के ड्यूटी और निरंतर अपडेट के दबाव में काम करते हैं। हालिया सर्वेक्षणों से स्पष्ट है कि 68 % कर्मचारियों को कार्य‑स्थल में पर्याप्त मानसिक समर्थन नहीं मिलता, जबकि 45 % ने कहा कि वे "डिप्रेशन या बर्न‑आउट" के जोखिम के अंतर्गत हैं। पिचाई की जल‑मध्यम शांति का उल्लेख, जिसे उन्होंने "लीडरशिप में नयी धीमी‑गति" कहा, इस अंतर को अभूतपूर्व रूप से उजागर करता है।

पिचाई के इस अनुभव के बाद, कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत में अपने भारतीय शाखाओं में माइंडफुलनेस वर्कशॉप और थीरोपी सत्रों की योजना बनायी़ है। परन्तु नीतिगत रूपरेखा अभी भी अस्पष्ट है। भारत सरकार द्वारा जारी किए गए "ऑक्यूपेशनल हेल्थ फ़्रेमवर्क" में मानसिक स्वास्थ्य को केवल एक वैकल्पिक विकल्प के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, जबकि अधिकांश कंपनियों में इसे अभी भी "प्रायोजक‑समर्थित" माना जाता है। यह आधा‑डिश़ा स्पष्टता कई बार प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है: बोर्डरूम में जल‑ऑक्सीजन की कमी, लेकिन पेशेवरों के मन में धुंधली गंदगी बनी रहती है।

आईटी मंत्रालय ने पिचाई की टिप्पणी को ध्यान में रखकर एक मसौदा दिशा‑निर्देश जारी किया, जिसमें कंपनियों को सालाना कम‑से‑कम दो दिनों की "डिजिटल डिटॉक्स" और प्रमाणित मनोवैज्ञानिक काउंसलर की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। हालांकि, आलोचक तर्क देते हैं कि यह केवल कागज़ पर बड़ी बात है, क्योंकि निरीक्षण तंत्र की कमी के चलते कई फर्में इस नियम को सिर्फ नाम मात्र की मार्केटिंग बना देती हैं।

सिविल सोसाइटी एनजीओ और श्रमिक संघों ने सरकार को यह अनुरोध किया है कि वे निकाय‑स्तरीय ऑडिट और दंडात्मक प्रावधान जोड़ें, ताकि नीतियों का वास्तविक कार्यान्वयन हो सके। कई छोटे‑मध्यम उद्यम (एसएमई) के प्रबंधक भी इस दिशा में भ्रमित हैं—वे बड़े बहुराष्ट्रीय कंपनियों की तरह विस्तृत मनो‑स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं दे सकते, फिर भी कर्मचारियों की हानि को रोकने के लिये न्यूनतम मानक स्थापित करने की आवश्यकता है।

संदीप पिचाई ने खुद कहा कि "शांत पानी में डुबकी लगाना हमें भीतर की गहरी शांति की याद दिलाता है, जिससे हम बेहतर निर्णय ले पाते हैं"। यह संदेश अब भारत में सतत कार्यस्थल‑सुरक्षा के विमर्श को जल में डुबकी की तरह गहरा कर रहा है—जहाँ नीति‑निर्माता, प्रबंधक और कर्मी सबको एक ही गहराई में उतरना होगा, तभी जल‑शांति से परे वास्तविक कार्य‑स्थल शांति को हासिल किया जा सके।

Published: May 6, 2026