सिंथेटिक ओपिओइड के घातक उदय पर फॉरेंसिक डॉक्टर का त्वरित कदम
देश के कई बड़े शहरों में अब साधारण हैरानी की बात नहीं रही; नशे के मिश्रण में नए‑नए सिन्थेटिक ओपिओइड्स के संकेत मिल रहे हैं। इन पदार्थों की शक्ति पारंपरिक हेरोइन या अफीम की तुलना में कई गुना अधिक है, जिससे मृत्यु दर में चौंकाने वाली वृद्धि देखी जा रही है। समस्या का पता चलने के बाद, राष्ट्रीय औषधि नियंत्रण संस्थान (एनसीडीए) के सहयोग से एक अनुभवी फॉरेंसिक डॉक्टर ने तेज़‑तर्रार जांच शुरू की, ताकि घातक पदार्थों की पहचान हों और दवाबग्रस्त समूह तक समय पर चेतावनी पहुँचाई जा सके।
जिन वर्गों को यह सबसे अधिक प्रभावित कर रहा है, वे हैं छोटा‑मोटा नौकरियों वाले, शहरी स्लम में रहने वाले और बेरोज़गार युवा। ये लोग अक्सर सस्ती दवाओं की तलाश में अनजान‑अनजान मिश्रण खरीदते हैं, जहाँ फेंटानिल, कार्फ़ीनिल आदि सिन्थेटिक ओपिओइड्स छिपे होते हैं। कई मारिज़ुअन केस रजिस्टर में अब सामान्य हेरोइन की तुलना में 5‑10 गुना अधिक मर्ज़ा के साथ विषाक्तता दर्ज की जा रही है।
हालाँकि, प्रशासनिक जवाबदेही में अभी भी खामियां बरकरार हैं। फॉरेंसिक लैबों में आधुनिक युक्तियों का अभाव, पुरानी थ्रेशहोल्ड‑आधारित रिपोर्टिंग प्रणाली और कई स्तरीय अनुमोदन प्रक्रियाएँ जांच को बिलकुल तेज़ी से नहीं चलने देतीं। यही कारण है कि बहुत से मामले में मृत्यु के बाद ही कारण पता चलता है—एक ऐसी प्रथा जो अब तक वर्जित नहीं हुई है।
डॉक्टर ने कहा, “समय पर विष की पहचान कर ही हम इस रोगी‑समूह को बचा सकते हैं। हमारे पास अब ‘आवश्यकता’ से ‘सुविधा’ की दिशा में बदलाव लाने की जरूरत है—ताकि हर रिपोर्टिंग लैब 24×7 काम करे, और परिणाम 24 घंटे के भीतर मिलें।” उनके इस आग्रह के लिए जिले के स्वास्थ्य प्रशासन ने तुरन्त ‘फैट‑ट्रैक’ योजना की घोषणा की, पर दायरे और बजट की अनिश्चितता ने इसको आधी कहानी बना दिया।
सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यह मुद्दा अब केवल नशे के एक भाग तक सीमित नहीं रहता; यह सामाजिक असमानता, शिक्षा की कमी और नीति‑निर्माण में अक्षम्य देरी को उजागर करता है। यदि शासन वर्ग ‘डिजिटलीकृत’ टॉक्सिकोलॉजी को प्राथमिकता नहीं देता, तो भविष्य में यह घातक मिश्रण ग्रामीण क्षेत्रों में भी धुंधली स्याही बन कर रह जाएगा। इस बीच, प्रभावित वर्ग को जागरूकता अभियानों, पुनर्वास केंद्रों और तत्काल दवा परीक्षण सुविधाओं की आवश्यकता है—विकल्प नहीं, अनिवार्य।
Published: May 4, 2026