शहरी बागों में मधुमक्खियों के छत्ते: स्वास्थ्य‑सुरक्षा खतरा और निकासी में प्रशासन की चूक
मधुमक्खी, प्रकृति की अनकही कामगार, हमारी फसलें और फूलों के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। फिर भी जब उनका घर हमारे आवासीय क्षेत्र या स्कूल के बाग में असहज रूप से स्थापित हो जाता है, तो इसका सामाजिक वजन काफ़ी बदल जाता है। नागरिकों को डाँडों के डर से लेकर जीवन‑धमकाने वाले एलर्जी तक के कई जोखिमों का सामना करना पड़ता है।
हाल ही में कई शहरों में रिपोर्ट मिलती हैं कि मधुमक्खी के छत्ते सार्वजनिक स्थानों के निकट बन रहे हैं, जिससे बच्चों, वृद्धों और दवा‑निर्भर व्यक्तियों के जीवन में अनावश्यक खतरा पैदा हो रहा है। चौबीस घंटे बेघर छत्तों पर गंधभरे घोंसले, जो कभी‑कभी अनजाने में भीड़भाड़ वाले बाजारों में फूट पड़ते हैं, इस बात की ओर इशारा करते हैं कि नगरपालिका सेवाओं में इस क्षेत्र के लिए कोई ठोस योजना नहीं है।
पर्यावरण‑अनुकूल समाधान की तलाश में जनता ने स्वयं कई प्राकृतिक उपाय अपनाए – पुदीने का तेल, लहसुन का मिश्रण, तथा धुंधली रोशनी वाले बत्तियों का प्रयोग – जो मधुमक्खियों को छत्ते छोड़ने के लिए प्रेरित करता है, बिना उन्हें मार‑पीट के। तथापि, इन उपायों को आधिकारिक तौर पर मान्यता या समर्थन नहीं मिला है। कई नगर निकाय अभी भी हानिकारक रसायनों से भरपूर कीटनाशकों का प्रयोग जारी रखते हैं, जिससे न केवल मधुमक्खियों बल्कि सम्पूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँचता है।
नीति विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और स्थानीय स्वच्छता नियमों में मधुमक्खी निकासी की स्पष्ट प्रक्रिया नहीं है। परिणामस्वरूप, जब नागरिक सहायता के लिए आवेदन करते हैं तो उन्हें ‘संबंधित विभाग से संपर्क करें’ जैसे रूढ़िवादी जवाब मिलते हैं। इस प्रशासनिक सुस्ती को देख कर ऐसा लगता है कि मधुमक्खियों के प्रति हमारा सम्मान केवल उनके परागण में सीमित है, जबकि उनके आसन्न घोंसले को सुरक्षित रूप से हटाने की जिम्मेदारी भूल गये हैं।
समाधान के रूप में विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि नगरपालिका को ‘इको‑फ़्रेंडली निकासी यंत्र’ स्थापित करने, प्रशिक्षित जैविक नियंत्रण इकाइयों को कार्यान्वित करने तथा नागरिकों को सुरक्षित एवं पर्यावरण‑स्निग्ध उपायों के बारे में जागरूक करने के लिए सशक्त सार्वजनिक अभियान चलाने चाहिए। अंत में, यह प्रश्न नागरिक सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन स्थापित करने की नीति‑निर्माताओं की वास्तविक प्रतिबद्धता पर निर्भर करता है – न कि केवल छत्तों के बँधे रहने की सहनशीलता पर।
Published: May 6, 2026