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Category: समाज

शहर के सार्वजनिक उद्यानों में देर के वसंत में मल्च ताज़ा करने की अनदेखी से पहुँची असुविधा

देर वसंत, जब मिट्टी की सतह धूप और शुष्क हवा से पर्याप्त रूप से सूख चुकी होती है, पौधों के लिये मल्च को नवीनीकृत करने का सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। इस वैज्ञानिक सिद्धान्त को कई नगर निकायों ने अपने हरितस्थल रखरखाव के निर्देशों में शामिल किया है, परन्तु वास्तविकता अक्सर इस आदर्श से बहुत दूर दिखती है।

सड़कों के किनारे, स्कूलों के खेलमैदान और वार्ड‑स्तरीय उद्यानों में पुराना, गीला मल्च अभी भी बिखरा हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दबाजी में या उस समय मल्च बदलना, जब जमीन अभी भी नम है, तो न केवल प्याज़ी पौधों की जड़ें तनावग्रस्त होती हैं, बल्कि कुदरती जलभंडारण क्षमता भी घट जाती है। परिणामस्वरूप, घास‑फूस का दाब बढ़ता है, खरपतवार तेजी से उगते हैं और जल की बर्बादी भी तेज़ी से होती है।

प्रसिद्ध हवा-पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. अंजलि वर्मा के अनुसार, “मल्च का सही समय पर नवीनीकरण मिट्टी के तापमान को नियंत्रित करता है, नमी को बनाए रखता है और कीट‑कीडों की आवृत्ति घटाता है। देर वसंत में यह कार्य करना न केवल बागवानी‐दृष्टिकोण से, बल्कि शहरी स्वास्थ्य‑सुरक्षा के लिये भी अनिवार्य है।”

जबकि विज्ञान स्पष्ट कर दे रहा है, कई नगर परिषदों में कार्य‑शेड्यूल अधूरे बजट और अति‑हैदराबादी मानदंडों के कारण टालता रहता है। रिपोर्टों से पता चलता है कि कुछ महानगरों ने पिछले दो वर्षों में 30 % से अधिक पार्कों में मल्च बदलने की योजना को रद्द या स्थगित कर दिया है। इसके पीछे मुख्य कारण बताया गया है “अपर्याप्त जल‑स्रोत” और “सर्दियों की अनिश्चित शुरुआत”, जो की व्याख्याएँ अक्सर “बिजली की बौछार” और “सड़क की धुंध” जैसी व्यंग्यात्मक टिप्पणियों में बदल जाती हैं।

इस लापरवाही के प्रत्यक्ष परिणाम शहरी गरीब वर्ग के लोगों को झेलने पड़ते हैं। झाड़ी‑जंगली पौधे और जल‑जमा होने वाली गड्ढे न केवल बच्चों के खेलने के लिये सुरक्षित नहीं रह जाते, बल्कि मच्छर‑जनित रोगों के जोखिम को भी बढ़ाते हैं। कई स्कूल के प्रधानाचार्य ने बताया कि “मल्च के कारण बना धूल‑भरा मैदान बच्चों को असुविधा देता है, और बारिश के बाद जल‑जमाव की समस्या रोज़मर्रा की बात बन गई है”।

शहरे के प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सवाल उठते हैं। कुछ विभागों ने “निर्माण‑वित्तीय वर्ष के अंत में बजट आवंटन” को प्राथमिकता दी, जबकि मौजूदा हरित‑परिसर की देखभाल को उपेक्षा की। इस असंगति को “आर्थिक जर्जरता” की एक नई परिभाषा माना जा सकता है, जहाँ सर्विस‑डिलीवरी की लागत को कम करके, सेवा की गुणवत्ता पर समझौता किया जाता है।

नागरिक समूहों ने इस मुद्दे को लेकर सभा आयोजित की है और कई नगर पालिकाओं से “देर वसंत में मल्च नवीनीकरण के लिए त्वरित कार्य‑योजना” बनाने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि “अधिकारिक निर्देशों की कड़ाई से पालना न केवल हरितस्थल को सुदृढ़ बनाती है, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य‑सुरक्षा को भी सुनिश्चित करती है”।

सारांशतः, देर वसंत में मल्च का समय पर नवीनीकरण वैज्ञानिक रूप से सिद्ध लाभ प्रदान करता है—खरपतवार नियंत्रण, नमी संरक्षण और तापमान स्थिरीकरण। फिर भी, नगर निकायों की बजट‑आधारित प्राथमिकताएँ, अति‑जटिल कार्य‑शेड्यूल और व्यर्थ प्रतिबंध इस लाभ को जनता से दूर कर रहे हैं। निरंतर अनदेखी का परिणाम न केवल शहरी हरियाली में गिरावट, बल्कि सामाजिक असमानता और सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम में वृद्धि है। अब समय आ गया है कि नीतियों को जमीन‑पर लागू करने के लिये वास्तविक बजट, सटीक समय‑सारणी और जवाबदेह प्रशासनिक तंत्र का निर्माण किया जाए।

Published: May 4, 2026