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शहर की कचरा समस्याएँ: नागरिकों के हाथों बना 'उपयोगी सजावट' संकेत प्रशासनिक लापरवाही का
शहर की गलियों में जमा कचरे की ढेरियाँ अब केवल गंदगी नहीं, बल्कि घर की सजावट का स्रोत भी बन गई हैं। पुरानी बोतलें, घिसी टायरें, टूटी-फूटी काँच की खिड़कियाँ और परिधानों से ढके ट‑शर्ट, जो कभी अनदेखे कोनों में जमा होते थे, अब स्थानीय निवासियों के रचनात्मक हाथों में नया रूप ले रहे हैं। यही कुछ ऐसा है जो न केवल व्यक्तिगत जीवन में शांति का आंदोलन लाता है, बल्कि नगरपालिका की अपर्याप्त कचरा प्रबंधन नीति की जाँच भी करता है।
वर्तमान में कई शहरी क्षेत्रों में कचरा संग्रहण की नियमितता में चूक, असंगत डस्टबिन व्यवस्था और अपर्याप्त पुनर्चक्रण केंद्रों की कमी साफ़ दिखती है। विशेषकर आर्थिक रूप से वंचित बस्तियों में कचरा ढेर‑ढेर होकर रहने वाले कमरे, स्वास्थ्य‑संबंधी जोखिम और सामाजिक असमानता को बढ़ा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि अनसँभाल कचरे से उत्पन्न धुंधली बदबू और कीट‑पैडों की उपस्थिति, श्वसन रोग और एलर्जी के मामलों में इज़राफ़ी वृद्धि कर रही है।
ऐसी स्थिति में स्थानीय जनता ने अपना उपाय खुद खोज लिया। पुराने बोतलों को लटकाते हुए लाइटिंग बनाना, टायरों को कुर्सी या बगीचे के कुर्सी के रूप में ढालना, टूटे हुए काँच को चमकते पैनल में बदलना, तथा पुराने कपड़ों से कुशन कवर बनाना—इन सभी DIY (Do‑It‑Yourself) प्रोजेक्ट्स ने न केवल घर की शोभा बढ़ाई है, बल्कि कचरे को प्रचलित निपटान‑के‑बाहरी जगहों से दूर भी रखा है। यह ‘अपसाइक्लिंग’ रुझान बस्ती‑बस्ती में एक प्रकार की सामुदायिक आत्मरक्षा बन गया है।
पर्याप्त समर्थन की उम्मीद में प्रशासन ने कुछ ‘सजावटी कार्यशालाओं’ की घोषणा की। व्यंग्य के कगार पर कहा जा सकता है कि नगर निगम ने “कचरा हीन” अभियान का स्लोगन तो लगा दिया, पर वास्तविक कचरे के संग्रहण‑तकनीकी ढाँचे की नींव अभी भी रिक्त पड़ी है। इस तरह की सतही पहलें, जिन्हें अक्सर ‘स्मार्ट सॉल्यूशन’ कहा जाता है, कच्चे तौर पर कचरा‑प्रबंधन की मूलभूत समस्या—संसाधनों की कमी, नियोजन‑की‑अशुद्धता और जवाबदेही‑की‑घाट—को हल नहीं कर पातीं।
स्थानीय निकाय के एक अधिकारी ने कहा, “हम नागरिकों के रचनात्मक प्रयासों को सराहते हैं, पर व्यापक स्तर पर कचरे की उचित निपटान के लिये नीतियों को सुदृढ़ करना अनिवार्य है।” अब सवाल यह बनता है कि क्या यह सराहना सिर्फ शब्दों तक सीमित रहेगी, या वास्तविक बजट आवंटन, पुनर्चक्रण सुविधाओं का विस्तार, और सूचनात्मक जागरूकता कार्यक्रमों के साथ प्रशासनिक लैब‑रेटरी को सक्रिय किया जाएगा।
अंततः, जब नागरिक अपने कचरे को सजावट में बदलते हुए निर्मम कूड़े‑से‑व्यवस्था के अभाव को झेला रहे हैं, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि ‘स्मार्ट अपसाइक्लिंग’ केवल एक रचनात्मक उपाय नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही के विरुद्ध एक सामाजिक निदर्शक बन चुका है। इस मुद्दे को हल करने के लिए नीति‑निर्माताओं को न केवल मौजूदा कचरा‑संकलन प्रणाली में सुधार करना होगा, बल्कि समानता‑भरी पुनर्चक्रण नीतियों को लागू कर यह सुनिश्चित करना होगा कि हर नागरिक को स्वच्छ और स्वस्थ जीवन‑पर्यावरण का अधिकार मिल सके।
Published: May 8, 2026