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Category: समाज

शिक्षा मंत्रालय का स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) 2026 दिशानिर्देश: आधारभूत शासन में बदलाव की दिशा में कदम

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षा की डेमोक्रेटिक नींव को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मंत्रालय ने 6 मई को स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) 2026 दिशानिर्देश जारी करने की घोषणा की है। यह पहल ग्रामीण‑शहरी समानता, अभिभावक‑शिक्षक सहभागिता और स्थानीय संस्थानों की निगरानी को केन्द्र में रखती है।

वास्तव में, पिछले दो दशकों में स्कूलों में शासन की कमी, उत्तरदायित्व के अस्पष्ट स्तर और सामुदायिक भागीदारी के अभाव ने कई बार गुणवत्ता में गिरावट, ड्रॉप‑आउट बढ़ने और बेसिक सुविधाओं की कमी को जन्म दिया है। नई गाइडलाइन में प्रत्येक स्कूल को कम से कम पाँच सदस्यीय एसएमसी बनाना अनिवार्य किया गया है, जिसमें अभिभावक, स्थानीय पंजीकृत गैर‑सरकारी संगठन के प्रतिनिधि और एक प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ता को शामिल किया जाएगा।

हालांकि नियामक प्रयोगात्मक्ता की बात स्पष्ट है, परंतु प्रशासनिक अड़चनें नई उलझन नहीं हैं। पिछले बार के दिशानिर्देशों में अनिवार्य प्रशिक्षण की कमी, बजट आवंटन में असमानता और निगरानी तंत्र के अपर्याप्त कार्यान्वयन ने कई राज्यों में उनका प्रभाव सीमित कर दिया। इस सन्दर्भ में नई गाइडलाइन में वार्षिक लेखा‑जोखा, ऑनलाइन रिपोर्टिंग पोर्टल और राज्य‑स्तरीय निरीक्षण समिति की व्यवस्था भी शामिल है — एक आशा की किरण, परंतु उसका वास्तविक उपयोग तभी दिखेगा जब ग्रासरूट स्तर पर तकनीकी समर्थन और निधि की भरोसेमंद पहुंच सुनिश्चित हो।

न्यूनतम सुविधाओं की माँग करने वाले शहरी स्कूलों और बुनियादी बुनियादी ढाँचे से वंचित ग्रामीण शिक्षालयों के बीच स्पष्ट असमानता रहती है। यदि अभिभावकों की आवाज़ को सच्चे अर्थ में नीति‑निर्माण में उतारा नहीं गया, तो यह नई प्रक्रिया भी केवल कागज़ी औपचारिकता बनकर रह सकती है। इसलिए, नागरिकों को अपनी सहभागिता का दायरा स्पष्ट करने, अभिव्यक्तियों को दस्तावेज़ित करने और सतत् निगरानी के लिये स्वतंत्र सिविल सोसाइटी मंचों की आवश्यकता होगी।

संक्षेप में, एसएमसी 2026 दिशानिर्देश शिक्षा में सामुदायिक सहभागिता को औपचारिक रूप देने की एक सराहनीय कोशिश है। लेकिन वास्तविक सुधार तभी संभव है जब बजट‑प्रक्रिया, प्रशिक्षण‑सुविधा और स्थानीय प्रशासनिक तत्परता में प्रणालीगत सुधार थामे रहे। इस दिशा में निरंतर सार्वजनिक जवाबदेही और नीति‑कार्यान्वयन की बेरोक‑टोक जांच ही असमानता को घटाकर शिक्षा के लोकतांत्रिक सिद्धांत को साकार कर पाएगी।

Published: May 4, 2026