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Category: समाज

वाशिंगटन की Stillaugamish जनजाति ने फसलों की जमीन को बाढ़‑प्रवण जलमग्न बनाकर चाइनूक सैल्मन की पुनरुज्जीवनी की योजना बनाई

संयुक्त राज्य के वाशिंगटन राज्य में Stillaugamish जनजाति ने अपने पारम्परिक क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि खरीदी है और मौजूदा लेवियों को तोड़ कर उन खेतों को फिर से जलस्थली में बदल दिया है। यह कदम न केवल स्वदेशी जलजीव – चाइनूक सैल्मन की आबादी को बढ़ाने की आशा रखता है, बल्कि मौजूदा कृषि‑पर्यावरणीय व्यवस्था की कई कमियों को भी उजागर करता है।

पर्यावरणीय विशेषज्ञों का मानना है कि फ़ार्मिंग के लिये निर्मित लेवियों ने प्राकृतिक जलधारा को बाधित किया है, जिससे सैल्मन के प्रवास मार्ग में बाधा पैदा हुई। जनजाति ने इस कारण से लेवियों को हटाकर नदी के किनारे पुरानी दलदलियों को पुनर्स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। इस प्रकार का इको‑रीस्टोरेशन भारत के कई जलसंकट‑ग्रस्त क्षेत्रों में देखी जाने वाली नीति‑असफलताओं से तुलना करता है, जहाँ सरकारी योजनाओं में अक्सर जमीन‑उपयोग के स्थानीय सामाजिक‑पर्यावरणीय आयाम को अनदेखा किया जाता है।

स्थानीय किसान इस परिवर्तन से दोधारी प्रभाव का सामना कर रहे हैं। एक ओर, जलमग्न क्षेत्रों में परिवर्तन के कारण कृषि उत्पादन में गिरावट और आजीविका का नुकसान हो सकता है; दूसरी ओर, संभावित मछली पकड़ने वाले व्यवसायों के उदय से नए रोजगार के अवसर उत्पन्न हो सकते हैं। इस पर सरकारी निकायों की प्रतिक्रिया धीमी रही है, जिससे किसानों को स्पष्ट दिशा‑निर्देश और प्रतिपूर्ति उपाय नहीं मिल पाए हैं।

सरकार के पास आधिकारिक तौर पर जलसंरक्षण और बायोडायवर्सिटी के बीच संतुलन स्थापित करने के लिये व्यापक नीति ढाँचा है, परन्तु इस तरह की जनजातीय पहलें अक्सर अनौपचारिक मंच पर ही समाप्त हो जाती हैं। Stillaugamish जनजाति की पहल के पीछे निहित प्रशासनिक लापरवाही इस बात की प्रतिबिंब है कि सार्वजनिक संस्थाएँ पर्यावरणीय न्याय को नागरिक अधिकार के साथ जोड़ने में अक्षम हैं।

जबकि जनजाति का उद्देश्य जैविक विविधता को पुनर्जीवित करना और भविष्य की जलसुरक्षा सुनिश्चित करना है, वहीं इसकी सामाजिक प्रभावशालीता—विशेषकर भूमि‑स्वामित्व, खेती‑परिचालन और स्थानीय आर्थिक असमानता—पर व्यापक सार्वजनिक चर्चा अभी तक नहीं हुई है। यह मामला नीति‑निर्माताओं को जलवायु‑अनुकूल कृषि, स्वदेशी अधिकारों और स्थानीय विकास के बीच सामंजस्य स्थापित करने की बाध्यता की याद दिलाता है।

Published: May 3, 2026