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Category: समाज

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वृद्धों में घुटन आपातकाल: अकेले होने पर क्या करें—निपुणता की कमी पर प्रशासनिक चूक

वृद्ध नागरिकों में भोजन की जल्दी या दवाई लेने की असावधानी से घुटन की घटनाएँ अक्सर सामने आती हैं। राष्ट्रीय आँकड़े दर्शाते हैं कि 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोग घुटन के शिकार होने की सम्भावना में दो‑तीन गुना अधिक जोखिम लेता है। यह समस्या केवल चिकित्सकीय आपातकाल नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य‑प्रणाली की चुप्पी का भी संकेत है।

डॉ. ओस्कार, एक अनुभवी फेफड़ा‑रोग विशेषज्ञ, ने हालिया सार्वजनिक व्याख्यान में बताया कि यदि आप अकेले हों तो तुरंत स्वयं‑हिल्टन (Heimlich) तकनीक अपनाएँ: पेट की ऊपरी सतह पर मजबूती से अंदर‑बाहर की गति से धक्का दें, फिर तुरंत आपातकालीन सेवा (108) को फोन करें। यह उपाय कभी‑कभी जिंदा रहने का एकमात्र रास्ता बन जाता है।

उपरोक्त उपाय तो व्यक्तिगत स्तर पर मददगार हैं, परन्तु यह सवाल उठता है कि क्या एक ऐसी जनसंख्या के लिए, जो अक्सर अकेले या गृहस्थ सहायता से वंचित रहती है, ऐसी मूलभूत प्रशिक्षण उपलब्ध है? भारत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रथम शारीरिक उपचार (First Aid) का पाठ्यक्रम अभी भी ‘वोक‑इन‑वोक‑आउट’ सिद्धान्त पर टिका है, जहाँ डॉक्टरों के पास भी इस कौशल का घिसा‑पिटा ज्ञान रहता है।

सरकारी योजनाओं में ‘व्यायाम व स्वास्थ्य’ या ‘सहज जीवन’ के तहत पेंशनभोगियों को एनीमेटेड वीडियो या ब्रोशर वितरित करने की बात कही गई है, परन्तु व्यावहारिक सत्र, सिमुलेशन या सामुदायिक प्रशिक्षण की कमी स्पष्ट है। यह वही कारण है कि कई घुटन की घटनाएँ घर के भीतर ही घातक रूप ले लेती हैं, जबकि सार्वजनिक स्थल पर ‘पहले‑उपचार’ स्टेशन्स की अनुपस्थिति भी एक बड़ी चूक है।

सामाजिक अंतराल को पाटने के लिये आवश्यक है कि नगरपालिकाएँ ‘आकाशीय प्राथमिक उपचार’ (First‑Aid) किट्स को सामुदायिक हॉल, वृद्धाश्रम और स्थानीय स्वास्थ्य भण्डार में स्थायी रूप से स्थापित करें, और प्रत्येक महादिवासियों को हर वर्ष दो‑बार सिमुलेशन का अवसर दें। इसके अतिरिक्त, एम्बुलेंस‑ड्राइवरों एवं स्वास्थ्य सहायकों को घुटन‑रोकथाम पर अद्यतन प्रोटोकॉल से लैस करना नीतिगत तौर पर अनिवार्य होना चाहिए।

इसीलिए, यह केवल व्यक्तिगत जागरूकता का सवाल नहीं, बल्कि सार्वजनिक नीति की विफलता को उजागर करता है। यदि सरकार ‘स्वास्थ्य के बुनियादी अधिकार’ को सच मानती है, तो वह वृद्धों के लिए केवल पेंशन नहीं, बल्कि ‘जीवित रहने के साधन’ भी सुनिश्चित करे—जिसमें घुटन जैसी तत्काल‑जीवन‑धमकी को रोकने के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण, उपकरण और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली शामिल हो।

Published: May 6, 2026