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Category: समाज

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रविचंद्रण अश्विन के करोड़ों-की आलीशान घर को लेकर शहरी योजना और सामाजिक असमानता पर सवाल

चन्नई के उपनगर में स्थित, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टार रविचंद्रण अश्विन का निजी आवास अब कई करोड़ रुपये की कीमत वाला एक महल बन गया है। दो-कहिया गलियारे, निजी स्विमिंग पूल, आधुनिक जिम और खुली हरी-भरी बागबानी इसे ‘कॉम्परोमाइस, फैमिली लाइफ और क्रिकेटिंग सपोर्ट’ के नाम से भी जाना जाता है। विदेश‑विधि में अर्जित करियर के परिणामस्वरूप ऐसी संपत्ति का निर्माण असाधारण नहीं माना जाता, पर इस संपत्ति का सामाजिक दृश्य का प्रतिबिंब होना रोचक है।

वहीं, उसी शहर में 30 % से अधिक जनसंख्या वार्षिक किराए में लगातार बढ़ती किंमत के कारण उचित आवास को नहीं पा रहे हैं। कई वार्ड में झुग्गी‑झोपड़ी वाले इलाकों में मौजूदा स्वास्थ्य क्लीनिक और सरकारी स्कूलों की क्षमता आधे से अधिक उपयोग में है, जिससे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसी स्थितियों में जब एक खेल आइकन का घर लाखों में बन रहा है, तो अल्पसंख्यक वर्ग की मूलभूत जरूरतों की चिह्नित उपेक्षा स्पष्ट ही हो जाती है।

शहरी नियोजन विभाग ने इस प्रोजेक्ट को ‘आधुनिक शहरी नमूना’ के रूप में अनुमोदित किया, जबकि समान भू‑क्षेत्र में आवासीय योजनाओं की कमी के लिए कई बार आधिकारिक नोटिस जारी हुए थे। कर अधिभार में छूट, विशेष जल‑बिजली सब्सिडी और भूमि‑अधिग्रहण की सहज प्रक्रिया ने इस महल को बनाना आसान बना दिया। वहीं, इस प्रक्रिया में स्थानीय नागरिकों से कोई सार्वजनिक परामर्श नहीं हुआ, न ही ग़रिब़ इलाकों के लिए वैकल्पिक आवासीय विकल्प प्रस्तुत किए गए।

नगर निगम और राज्य स्तर के कई सामाजिक संगठनों ने इस मामले को ‘सार्वजनिक संसाधनों का निजी उपयोग’ कहते हुए, पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग की है। वे कहते हैं कि अगर ‘स्पिन विज़र्ड’ को अपने घर के लिए इस तरह की सुविधाएँ मिल सकती हैं, तो साधारण श्रमिक वर्ग को भी समान अवसर मिलने चाहिए। कुछ समाचार पत्रों ने यह भी उजागर किया कि इसकी तुलना में समान आय वाले मध्यम वर्ग के परिवारों को सरकारी आवास योजना के लिये लंबी कतारें झेलनी पड़ती हैं।

व्यंग्य यह है कि शहरी नियोजक शायद यह मानते हैं कि एक क्रिकेट सितारा का गृहस्थी शहर की सभी समस्याओं का ‘स्पिन’ कर ही देगा। लेकिन वास्तविकता में, इस तरह के प्रीमियम प्रोजेक्ट्स के पीछे नीति‑निर्माताओं का प्राथमिक ध्येय अक्सर राजस्व उत्पन्न करना और प्रतिष्ठा बढ़ाना होता है, न कि सामाजिक समानता सुनिश्चित करना।

यह घटना शहर के नियोजन में नीतिगत अंतराल को उजागर करती है। विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि ऐसी उच्च प्रोफ़ाइल संपत्तियों के निर्माण को सार्वजनिक हित के साथ संतुलित किया जाए, तो निजी निवेश को सामाजिक बुनियादी ढाँचे में पुनः निवेश करके शिक्षा, स्वास्थ्य और सस्ते आवास का विस्तार संभव हो सकता है। वर्तमान में, सार्वजनिक संसाधनों के वितरण में असमता ही प्रमुख चुनौती बनी हुई है, और जवाबदेही के बिना यह असमता और गहरी हो सकती है।

Published: May 9, 2026