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Category: समाज

राजस्थान स्टाफ चयन बोर्ड ने लैब असिस्टेंट एडमिट कार्ड जारी किए, उम्मीदवारों को दस्तावेज़ी झंझट का सामना

राजस्थान स्टाफ चयन बोर्ड (RSSB) ने आज, 5 मई को अपनी आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से RSSB लैब असिस्टेंट (2026) प्रवेश कार्ड जारी कर दिया। यह कार्ड 9 और 10 मई को निर्धारित जियो‑ग्राफी एवं साइंस शाखाओं की लिखित परीक्षाओं के लिए उम्मीदवारों को आवश्यक प्रमाणपत्र के रूप में कार्य करता है।

कार्ड में परीक्षा का समय‑सारणी, सत्रस्थल और विशेष प्रवेश निर्देश दर्शाए गए हैं। साथ ही, बोर्ड ने स्पष्ट किया कि उम्मीदवारों को इस कार्ड का प्रिंट आउट लेकर वैध पहचान पत्र (आधार, पैन या वोटर आईडी) के साथ परीक्षा स्थल पर उपस्थित होना अनिवार्य है। यह दो‑स्तरीय दस्तावेज़ीय आवश्यकता, विशेषकर उन लोगों के लिये समस्याग्रस्त हो सकती है जो ग्रामीण या सीमांत क्षेत्रों में रहते हैं, जहाँ प्रिंटर, काग़ज़ और विश्वसनीय पहचान पत्र की उपलब्धता अक्सर संदेहपूर्ण रहती है।

डिजिटल रूप से आधिकारिक सूचना का त्वरित प्रसारण “स्मार्ट” कदम लगता है, परंतु उसके साथ मिलने वाली काग़ज़ी अनिवार्यता प्रशासन की दोहरी कोप में नज़र आती है। 24 घंटे के भीतर ऑनलाइन कार्ड अपलोड और उम्मीदवारों को घर-घर प्रिंटर की तलाश में भेजना, नीतिगत असंगति दर्शाता है। कई सामाजिक वर्गों से आवाज़ें उठ रही हैं कि इस तरह की “डिजिटल‑पहले‑ऑफ़लाइन‑बाद” नीति, वो कम आय वाले अभ्यर्थियों को असुविधा में डाल रही है, जो अक्सर सार्वजनिक पुस्तकालय या स्कूल के कंप्यूटर में ही अपने दस्तावेज़ डिजिटल रूप में देख पाते हैं।

साथ ही, पहचान पत्र की अनिवार्य मंशा के पीछे सुरक्षा कारण है, परंतु यह भी सवाल उठाता है कि क्या सभी उम्मीदवारों के पास अद्यतन आधार या पैन कार्ड है। अंशकालिक मजदूर, महिलाओं के साथियों या प्रवासी श्रमिकों के मामूली मामलों में ऐसा नहीं हो सकता, जिससे असमानता और सामाजिक असंतुलन गहरा होता है। प्रशासनिक रूप से, इस दिशा‑निर्देश को स्पष्ट रूप से सार्वजनिक कर, मुद्रण सुविधाओं की उपलब्धता या लो‑कस्ट वैकल्पिक विकल्प (जैसे मोबाइल‑व्यू एड़मिट) की घोषणा न करना, नीति‑कार्यान्वयन में एक स्पष्ट त्रुटि को उजागर करता है।

परिणाम स्वरूप, कई उम्मीदवारों ने आधिकारिक पोर्टल पर FAQ सेक्शन में “प्रिंट नहीं कर पा रहा/रही हूँ” जैसी पूछताछ की है, जबकि उत्तर अक्सर “कृपया निकटतम कंप्यूटर सेंटर से संपर्क करें” जैसा ही है। यह न केवल समाधान की गति को धीमा करता है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की धारणा को भी धूमिल करता है। यदि इस व्यवस्था को ठोस आधार पर पुन:परिशोधित नहीं किया गया, तो आगामी परीक्षा में गैर‑हाजरी या अयोग्य प्रवेश की संभावना बढ़ेगी, जो सालों से प्रतीक्षित सरकारी नौकरी के सपनों को धूमिल कर सकती है।

संक्षेप में, RSSB की एड़मिट कार्ड जारी करने की प्रक्रिया तकनीकी प्रगति के साथ जुड़ी हुई दिखती है, परंतु वह सामाजिक-आर्थिक विविधताओं को ध्यान में रखे बिना “एक ही रूपरेखा” सभी पर थोपने की कोशिश करती है। इस असंतुलन को सही करने हेतु, प्रशासन को डिजिटल‑पहले‑इंटरफेस के साथ काग़ज़ी‑बैकअप विकल्प, स्थानीय प्रिंटिंग सुविधा सहयोग और पहचान‑पत्र की वैधता के लचीले मानक जैसे व्यावहारिक उपाय अपनाने चाहिए—वरना “बिजली‑जैसे त्वरित” सूचना के बाद भी उम्मीदवारों को “काग़ज़‑जैसे बोझिल” परेशानी ही सहनी पड़ेगी।

Published: May 5, 2026