विज्ञापन
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ में वकील की आवश्यकता है?
आपराधिक मुकदमों, जमानत, गिरफ्तारी, एफआईआर, जांच और उच्च न्यायालयी कार्यवाही से जुड़े कानूनी मार्गदर्शन के लिए यहां क्लिक करें।
यू.पी.एसएसएससी की 929 एएसओ‑एआरओ भर्ती में अंतिम तिथि नज़दीक, नौजवानों के आशाओं पर प्रशासनिक कष्ट
उत्तर प्रदेश उपविभागीय सेवाएँ चयन आयोग (UPSSSC) ने असिस्टेंट स्टैटिस्टिकल ऑफिसर (ASO) व असिस्टेंट रिसर्च ऑफिसर (ARO) के लिये 929 पदों की भर्ती का आह्वान किया है। अंतिम पंजीकरण 11 मई 2026 को समाप्त हो रहा है, जिससे इस समय‑सीमा के भीतर लाखों आशावान युवा अपने प्रॉफ़ाइल को डिजिटल फ़ॉर्म में जमा करने की पुनः‑जाँच कर रहे हैं।
अर्हता‑शर्तें स्पष्ट हैं: अभ्यर्थियों को 2025 की प्रोफेशनल एग्जामिनेशन टेस्ट (PET) में उपस्थित होना आवश्यक है और उन्हें कम से कम स्नातकोत्तर डिग्री रखनी चाहिए। जबकि यह मानदंड शैक्षणिक योग्यता को सुदृढ़ करने का दावा करता है, यह उन सामाजिक वर्गों को बाहर रखता है, जो ग्रामीण या आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों में रहते हैं और PET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए संसाधनों की कमी झेलते हैं।
भर्ती का उद्देश्य प्रदेश में नौकरियों की कमी को संबोधित करना है, परंतु 929 पदों पर प्रतिस्पर्धा का स्तर अत्यधिक होगा। पिछले वर्षों में समान विज्ञापनों के आँकड़े दर्शाते हैं कि प्रत्येक उपलब्ध पद पर लगभग 200 से 300 आवेदन मिलते हैं, जिसका अर्थ है कि बड़ी संख्या में योग्य उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया से बाहर किया जाएगा। इस प्रकार, रोजगार‑संकट का समाधान बनाम रोजगार‑भारी प्रक्रिया के बीच असंगति स्पष्ट होती है।
डिजिटल पंजीकरण के लिये ऑनलाइन पोर्टल का प्रयोग अनिवार्य किया गया है, जिससे कनेक्टिविटी, तकनीकी साक्षरता और अभिधारित समय‑सीमा के कारण कई अभ्यर्थियों को पीड़ा झेलनी पड़ती है। विशेषकर ग्रामिण इलाकों में इंटरनेट अभिगम्य नहीं है; जहाँ सरकारी कार्यालय में ही कंप्यूटर उपलब्ध हो, वहाँ भी कतार‑बद्ध प्रतीक्षा का सामना करना पड़ता है। प्रशासन का यह ‘स्मार्ट‑सर्विस’ मॉडल, दुर्भाग्यवश, असमानता को और गहरा कर रहा है।
चुनाव प्रक्रिया लिखित परीक्षा पर आधारित है, लेकिन परिणामों की घोषणा में अक्सर देरी होने की खबरें सामने आती रही हैं। पिछले वर्ष में परिणाम प्रकाशित होने में छह महीने से अधिक का विलंब हुआ, जिससे चयनित उम्मीदवारों के करियर योजनाओं में अड़चन उत्पन्न हुई। ऐसी व्यवस्थित देर का व्यंग्य यह है कि जहाँ नौकरियों की कमी को भरने के लिए समय‑सीमा घटा दी गई, वहीं परिणामों का इंतज़ार असीमित रह जाता है।
समाज के व्यापक हित की दृष्टी से, इस भर्ती को केवल एक संख्या‑आधारित कार्य नहीं, बल्कि सार्वजनिक रोजगार नीति के परीक्षण के रूप में देखना आवश्यक है। यदि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता, समयबद्धता और समान अवसर की गारंटी नहीं दी गई, तो यह न केवल युवाओं के रोजगार आशा को चोट पहुँचाता है, बल्कि राज्य के सामाजिक‑आर्थिक विकास की दिशा को भी धुंधला कर देता है।
निवेश‑पर‑मानव‑संपदा के इस चरण में, प्रशासन से स्पष्ट अपेक्षा है कि वह न केवल पदों की संख्या बढ़ाए, बल्कि चयन‑मापदंड, सूचना‑प्रकाशन और परिणाम‑प्रक्रिया में तकनीकी तथा सामाजिक बाधाओं को दूर करे। तभी यह भर्ती वास्तव में उत्तर प्रदेश के युवाओं के भविष्य में आशा की रोशनी बन पाएगी।
Published: May 8, 2026