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Category: समाज

मई में हर घर के बगीचे को नया रूप: नगर निकाय की पहल पर सवाल

नगर निगम ने इस महीने के प्रारम्भ में सभी नागरिकों को मई के ‘अनुकूल मौसम’ का फायदा उठाते हुए अपने आवासीय बगीचे पुनः व्यवस्थित करने का निर्देश जारी किया। औपचारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह पहल शहरी स्वास्थ्य, जल संरक्षण और सामुदायिक सौंदर्य को बढ़ावा देगी। हालांकि, इस ‘हर घर में हरियाली’ के बड़े घोषणापत्र को व्यावहारिक रूप में कई ठोस प्रश्नों ने घेर रखा है।

सबसे पहले, अभियान का प्रमुख तकनीकी सुझाव—उपेड़ियों एवं मध्यम‑शरद ऋतु के पौधों को अंतिम ठंढ के बाद लगाना—बिल्कुल वैज्ञानिक है, पर इसे कार्यान्वयन के साधनों के बिना प्रस्तुत करना प्रशासनिक अंधाधुंधता का नमूना है। छोटे-परिवार वाले किरायेदारों और निम्न आय वर्ग के निवासियों को जहाँ बागवानी के लिये पर्याप्त स्थान नहीं, वहाँ इसे अनिवार्य बताना असमानता को बढ़ावा देता है। नगर की ओर से कोई सब्सिडी, बीज वितरण या तकनीकी सहायता का विवरण नहीं दिया गया, जबकि साक्ष्य से पता चलता है कि कई वार्डों में जल‑स्रोत तक पहुँच भी असमान है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि घर के बगीचे में हरी-भरी पत्तियों का बढ़ना वायु में प्रदूषकों को कम कर सकता है, पर इस लाभ को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने के लिए नीतियों में एकीकृत कराना आवश्यक है। मौजूदा नगरपालिका योजना‑दस्तावेज़ में बागवानी को ‘सौंदर्य’ के खंड में सीमित किया गया है, न कि ‘स्वास्थ्य’ या ‘शिक्षा’ के अंतर्गत, जिससे निरूपण स्पष्ट हो जाता है कि यह पहल सतही रूप से ही बनी है।

नागरिक समूहों ने इन अभावों को उजागर करते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में शहरी पर्यावरणीय सुधार चाहती है, तो पहले सार्वजनिक पार्कों की नियमित देखभाल, जल‑संरक्षण के लिये जल‑टैंक और निचली आय वर्ग के लिये वित्तीय‑तकनीकी मदद की व्यवस्था करनी चाहिए। बग़ैर उन बुनियादी सुविधाओं के, व्यक्तिगत बगीचे की ‘परिवर्तन’ को ‘हर नागरिक की जिम्मेदारी’ बना देना नीति‑निर्माताओं के लिये आत्म-प्रशंसात्मक बहाना बन जाता है।

अब तक नगर निगम के प्रमुख ने कहा है कि इस दिशा‑निर्देश को ‘स्वैच्छिक’ माना गया है और किसी भी अनिवार्य जुर्माने की बात नहीं की गयी। यह बयान खुद में एक हल्की व्यंग्यात्मक ताना है: प्रशासन ने ‘ऐच्छिक’ शब्द का उपयोग करके दबाव को कम किया, जबकि टाल‑मटोल से पहले ही बागवानी के लिये अतिरिक्त संसाधन की कमी को इंगित किया गया है।

जैसे ही मई के फूलों का सीजन शुरू हो रहा है, इस बगीचा‑पुनरुत्थान अभियान को वास्तविकता में बदलने के लिये नीतिगत समर्थन, आर्थिक प्रोत्साहन और जल‑संसाधनों की सुदृढ़ता आवश्यक होगी। जब तक यह तर्कसंगत ढांचा नहीं तैयार होता, तब तक ‘हर घर में हरियाली’ केवल एक काग़ज़ी वादे की तरह ही बना रहेगा।

Published: May 5, 2026