जो होना ही था, उसे दर्ज करता, देखता और सवाल करता समाचार मंच

Category: समाज

विज्ञापन

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ में वकील की आवश्यकता है?

आपराधिक मुकदमों, जमानत, गिरफ्तारी, एफआईआर, जांच और उच्च न्यायालयी कार्यवाही से जुड़े कानूनी मार्गदर्शन के लिए यहां क्लिक करें

मे में अनदेखी हुई शहर के उद्यानों की जापानी मेपल देखभाल, गर्मियों में शहरी ठंडक घट गई

भारत के कई महानगरों के सार्वजनिक उद्यानों में जापानी मेपल (जापानी शेज़) को सजावटी महत्व दिया जाता है, परन्तु मई के शुरुआती हफ्तों में इन पेड़ों की बुनियादी देखभाल – हल्की छंटाई, दो‑तीन इंच की जैविक मल्च परत और मिट्टी की आर्द्रता की जाँच – अक्सर अनदेखी रह जाती है। परिणामस्वरूप, गर्मी के महीने में पत्ते मुरझा कर इस आकर्षण को धुंधला कर देते हैं और शहरी ठंडक के स्रोत में कमी आ जाती है।

उद्यान प्राधिकारी, वृक्ष विशेषज्ञों और नागरिक समूहों के बीच एक आम सहमति है कि मई में छंटाई करने से शाखाओं की वृद्धि नियंत्रित होती है और धुंधलापन कम होने से सूर्य की तीव्रता कम होती है। मल्च की परत न केवल जड़ें ठंडी रखती है, बल्कि वर्षा‑जल को भी धरती में रुकने देती है, जिससे जल‑संकट के समय में पेड़ को अतिरिक्त पानी मिल सके। वहीं, जल‑वितरण को जल‑आवश्यकता के अनुसार समायोजित न करने से अधिक सिंचाई या सूखा दोनों ही स्थितियाँ उत्पन्न हो जाती हैं, जिससे पेड़ की निरोगी वृद्धि बाधित होती है।

इन मूलभूत उपायों में कमी के कारण कई नगरों में मेपल के पेड़ इस साल विचलित हो गये हैं। दिखते हैं तो हरे‑भरे, पर तेज़ धूप में पत्तों की झड़ना तेज़ हो गई है, जिससे आसपास के निवासियों को अतिरिक्त ठंडक की कमी का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर वृद्धों, बच्चों और रोग‑ग्रस्त व्यक्तियों के लिए शहरी हरित क्षेत्रों से मिलने वाली नैसर्गिक ठंडक का अभाव, स्वास्थ्य‑सम्बंधी जोखिमों को बढ़ा रहा है।

शहर परिषद ने अभी‑तभी एक बयान जारी कर कहा कि इस वर्ष वानिकी विभाग ने “जापानी मेपल की देखभाल हेतु विस्तृत कार्य‑योजना” तैयार की है और अगले महीने से नियमित छंटाई एवं मल्चिंग शुरू की जाएगी। लेकिन पिछले दो वर्षों में इसी प्रकार के वादे कई बार जारी हुए, जबकि वास्तविक कार्यान्वयन में लगनशीलता नहीं दिखी। विशेषज्ञों का तर्क है कि नीति‑निर्माण से अधिक महत्वपूर्ण है इस बात की निगरानी कि कर्तव्य परिधान पर कितनी बार जाँच‑परख की जा रही है।

स्थानीय पर्यावरण संगठनों ने इस लापरवाही को “नगर नियोजन में हिरा‑हिरा वाणिज्यिक उन्नति के पीछे प्राकृतिक संवेदनशीलता की उपेक्षा” कहा है। उन्होंने नगर निगम को तुरंत कार्यान्वयन‑केंद्रित हफ़्ता‑प्रत्येक योजना प्रस्तुत करने की माँग की है, जिसमें छंटाई‑समय‑सूची, मल्चिंग‑गुंजाइश और जल‑आवश्यकता‑जाँच के मानक शामिल हों।

वास्तविकता यह है कि मे‑में अनदेखी की गई एक साधारण देखभाल प्रक्रिया, शहर के तापमान को घटाने, जल‑सुरक्षा को सुदृढ़ करने और नागरिकों को शारीरिक‑मानसिक आराम प्रदान करने में बड़ी भूमिका निभा सकती थी। प्रशासन की “ठेले ‑ भविष्य ‑ परिचालन” पर फोकस, अक्सर छोटी‑छोटी चुप्पी में बदल जाता है, जिससे शहरी हरित‑आवास का भविष्य धुँधला दिखता है।

Published: May 7, 2026