मैन सिटी की ड्रॉ ने उजागर किया विदेशियों के फुटबॉल में नीति‑उपेक्षा, भारत की खेल सुविधाओं की असमानता
मंगलवार को एवरटन के खिलाफ मन सिटी का 3-3 ड्रॉ, जिसके बाद उन्हें शीर्षस्थ आर्सेनल से पाँच अंकों की दूरी मिल गई, केवल एक पॉइंटिंग‑एरर नहीं रहा। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि जहाँ यूरोपीय क्लबों को हर क्षण की कड़ी निगरानी और विशाल वित्तीय समर्थन मिलता है, वहीं भारत में खेल‑इन्फ्रास्ट्रक्चर के प्रति शासन की प्रतिबद्धता अब भी अधूरी है।
भारतीय युवाओं के लिये फुटबॉल कई वर्षों से एक संभावित करियर विकल्प रहा है, परंतु बेसिक सुविधा‑सुधार, प्रशिक्षक प्रशिक्षण और ग्रामीण स्तर पर मैदानों की कमी ने उनके सपनों को निराधार बना दिया है। जबकि विदेश में मैन सिटी जैसे क्लब की खेल‑कमीशन, वैविध्यपूर्ण डाटा‑एनालिटिक्स और उच्चस्तरीय स्टेडियम का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है, भारत में कई शहरों में अभी भी असमान भूमि पर फुटपाथ के साथ सॉकर ग्राउंड का अस्तित्व बचा है।
सरकारी नीतियों को अक्सर “खेल को व्यावसायिक बनाओ” के नारों के साथ प्रचारित किया जाता है, परन्तु वास्तविक कार्यान्वयन में वह फॉर्मूला अक्सर “सही जगह, सही समय पर निवेश नहीं” बन जाता है। फील्ड‑सर्वे के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में राष्ट्रीय खेल बजट में केवल 2 % ही बेसिक ग्रास‑रूट सुविधाओं में गया, जबकि विदेश में क्लबों के लिए वह प्रतिशत 40‑50 % तक पहुँचता है। यह अंतर स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि प्रशासनिक प्राथमिकताएँ कहाँ स्थित हैं।
सार्वजनिक जवाबदेही के अभाव को लेकर खेल‑सम्बंधी NGOs ने कई बार सरकार से स्पष्टीकरण माँगा है, परन्तु उत्तर अक्सर “बजट में बदलाव लाना कठिन है” तक सीमित रह जाता है। इस संदर्भ में, मैन सिटी की अस्थायी हार को देख कर भारतीय प्रशंसकों को यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या हमारे देश में भी ऐसे ही “गेम‑इन‑हैंड” होने की संभावना है—अर्थात प्रतिबंधित संसाधनों के साथ प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ना।
निष्कर्षतः, यूरोपीय फुटबॉल की दुविधा हमें यह याद दिलाती है कि खेल सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक समावेश, स्वास्थ्य और शिक्षा का भी अभिन्न भाग है। यदि नीति‑निर्माताओं ने केवल विदेशी लीगों की टाउन‑हॉल चर्चाओं पर ध्यान दिया, तो भारतीय नागरिकों के सामने रहने वाली असमानता और निराशा को कम करने की कोई आशा नहीं बचती। प्रशासकीय जमीनी स्तर पर अद्यतन योजना और पारदर्शी निवेश ही इस अंतर को पाटने का एकमात्र रास्ता है।
Published: May 5, 2026