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Category: समाज

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भुवनेश्वर में अचल संपत्ति बूम: वितरित लाभ और असमानता की राह

पिछले दो वर्षों में भुवनेश्वर को पूर्वी भारत के रियल एस्टेट हॉटस्पॉट का खिताब मिला है। हाईवे विस्तार, नई आईटी पार्क, शैक्षणिक संस्थानों का विस्तार और राष्ट्रीय राजधानी योजना के तहत बेहतर कनेक्टिविटी ने निवेशकों को इस शहर के पाँच प्रमुख आवासीय क्षेत्रों – ऍडवांस्ड सिटी, जयनारायण पाथ, लिंगराजाबुर्ला, नंदन पॉलिटेक्निक और रूद्रायन जांगली – की ओर धकेला है। इन क्षेत्रों में प्रीमियम कीमतों पर अपार्टमेंट, विला और रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स उभर रहे हैं।

परंतु इस तेज़ी से बढ़ते रियल एस्टेट बाजार के पीछे सामाजिक असंतुलन का एक बड़ा सफ़र छिपा है। उच्च वर्ग को मिल रही सुविधाओं की चमक के बीच, मध्यम और निम्न आय वर्ग को सस्ते, सुरक्षित रहने की जगह मिलने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। गृह ऋण की आसान उपलब्धता, विदेशी निवेशकों का जुड़ाव और प्रीमियम प्रोजेक्टों की भरमार ने जमीन की कीमतों को आसमान छू बना दिया, जिससे स्थानीय किरायेदारों को न केवल किराए में बढ़त झेलनी पड़ रही है, बल्कि कई पारिवारिक घरों को बिक्री के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

भुवनेश्वर के मौजूदा बुनियादी संरचना, जैसे जल आपूर्ति, स्वच्छता, सार्वजनिक स्कूल और प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल केंद्र, इस तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या को समायोजित करने में पीछे रह गए हैं। नई आवासीय एरिया के आसपास जल टैंकों की कमी, कचरे के निपटान की अनियमितता और सार्वजनिक स्कूलों में अतिरिक्त छात्र वर्गों की भीड़ ने नागरिकों के जीवन स्तर को घटा दिया है। इन समस्याओं का समाधान मांगते हुए स्थानीय नागरिक समूहों ने कई बार सार्वजनिक मंच पर आवाज़ उठाई, पर प्रशासनिक प्रतिक्रिया अक्सर “बजट अगले वित्तीय वर्ष में जारी होगा” या “स्थानीय निकायों को कार्य निर्देश दिये गए हैं” तक सीमित रही है।

शहर योजना विभाग ने कहा कि 2024‑2027 की विकास योजना में “पर्याप्त किफायती आवास” का प्रावधान है, परंतु उस योजना में निर्धारित इकाइयों की संख्या अभी तक सरकारी मंज़ूरी नहीं मिली है। वहीं, उच्च वर्ग के लिए विशेषीकृत सड़कों, स्मार्ट पार्किंग और ‘ग्रीन बेल्ट’ के निर्माण की घोषणा की गई, जो कि अधिकांश नगरवासी की रोज़मर्रा की जरूरतों से दूर हैं। इस असंगति पर राजनीतिक विश्लेषकों ने बताया कि नीति‑निर्माताओं का ध्यान “शानदार इमारतों को धूमधाम से उजागर करना” है, जबकि ‘समावेशी शहरी विकास’ को केवल शब्दकोश में ही रखा गया है।

सार्वजनिक जवाबदेही पर सवाल उठते रहेंगे जब तक कि ठोस कदम नहीं उठाए जाते। नागरिकों ने प्रस्तावित किया है कि भूमि उपयोग नियमन को सख्ती से लागू किया जाए, किफायती आवास के लिए विशिष्ट ज़ोन निर्धारित किए जाएँ, और मौजूदा बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए स्पष्ट समय‑सीमा तय की जाए। अगर ये मांगें पूरी नहीं हुईं, तो भविष्य में भुवनेश्वर का रियल एस्टेट बूम सामाजिक असमानता की एक और बड़ी त्रासदी में बदल सकता है।

Published: May 7, 2026