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Category: समाज

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बिहार सार्वजनिक सेवा आयोग ने 72वें सीसीई 2026 के लिए आवेदन प्रारम्भ किए, 1186 पदों की भर्ती

बिहार सार्वजनिक सेवा आयोग (BPSC) ने आज से 31 मई 2026 तक 72वें संयुक्त प्रतिस्पर्धी परीक्षा (CCE) के लिये ऑनलाइन आवेदन स्वीकार करना शुरू कर दिया। दी गई सूचना के अनुसार कुल 1 186 vacancies घोषित की गई हैं, जबकि 44 “शुगरकेन ऑफिसर” पदों को पीछे हटाया गया। यह चयन प्रक्रिया प्रशासनिक, पुलिस व विकास सेवाओं के लिये है और प्रदेश में तेज‑गति से बढ़ती नौकरियों की कमी को भरने की आशा रखती है।

आवेदन हेतु न्यूनतम शैक्षणिक मानदंड केवल स्नातक रहने का है, जबकि आयु सीमा वर्ग‑वार 20 से 42 वर्ष निर्धारित की गई है। चयन प्रक्रिया में प्रारम्भिक चरण में नकारात्मक अंकन वाला लिखित परीक्षा, उसके बाद मुख्य परीक्षा तथा व्यक्तिगत साक्षात्कार शामिल है। शुल्क सिर्फ ₹100 निर्धारित किया गया है, पर इसके साथ बायोमैट्रिक वैधता हेतु अतिरिक्त शुल्क भी वसूला जाएगा।

पिछले कुछ वर्षों में बिहार में बेरोज़गार युवाओं की संख्या में वृद्धि एक सामाजिक मुद्दा बन चुका है। इस भर्ती को उन युवाओं के लिये एक नज़रिये के रूप में देखा जा रहा है, जो सरकारी नौकरियों में स्थिरता और सामाजिक मान्यता की तलाश में हैं। हालांकि, 44 शुगरकेन ऑफिसर पदों को हटाने से कृषि‑उन्नयन के मुद्दे पर फिर से चर्चा छिड़ी है। बिहार की प्रमुख फसल शुगरकेन से जुड़ी किसानों की समस्याओं को देखते हुए इस पद द्वारा अपेक्षित तकनीकी सहायता का अभाव, नीति‑निर्धारण में मौजूदा असमतुल्यता को उजागर करता है।

ब्यूरोक्रेसी ने अक्सर इस तरह के बड़े‑पैमाने के भर्ती प्रक्रिया में “बायोमैट्रिक शुल्क” जैसे छोटे‑छोटे शुल्क को लेकर आलोचना का सामना किया है। यह संकेत देता है कि जबकि नौकरियों की संख्या बढ़ाने की ओर कदम उठाए जा रहे हैं, वही समय प्रशासनिक प्रक्रिया में निरंतर “डिजिटल पेंशन” की मांग भी बढ़ रही है—जैसे कि बायोमैट्रिक डाटा संग्रह, जो अक्सर तकनीकी असमानता वाले ग्रामीण क्षेत्रों में बाधा बनता है।

समरिक रूप से, यह पहल सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ-साथ नीति‑समर्थन का मिश्रण प्रतीत होती है। यदि चयन प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध रहे, तो यह बिहार के प्रशासनिक ढाँचे को सुदृढ़ कर सकेगी। लेकिन यदि आवेदन प्रक्रिया में तकनीकी चुनौतियों और शुल्क‑संवेदनशीलता को नजरअंदाज किया गया, तो वही अभियांत्रिकी उन ही श्रमिक वर्गों को बाहर रख सकती है, जिनके लिये ये नौकरियां सबसे अधिक मायने रखती हैं।

आखिरकार, 72वें CCE की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या बिहार सरकार केवल पदों को बनाये रखने तक सीमित रहेगी, या वह वास्तविक सामाजिक‑आर्थिक अंतर को घटाने की दिशा में कदम बढ़ाएगी।

Published: May 7, 2026