बीएसईबी ने कक्षा 11 प्रवेश के लिए पहली चयन सूची जारी की, छात्रों को केवल 8 दिनों में पुष्टि करनी होगी
बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (बीएसईबी) ने ऑनलाइन फ़ैसिलिटी फॉर स्कूल सिलेक्शन (ओएफएसएस) के माध्यम से कक्षा 11 के लिये पहली चयन सूची प्रकाशित कर दी है। सूची को ofssbihar.net से डाउनलोड किया जा सकता है। चयनित छात्रों को 5 मई से 12 मई 2026 के भीतर अपनी सीट की पुष्टि करनी होगी, अन्यथा उनका नाम रद्द बताया जाएगा।
भ्रमण‑उन्मुख शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत में यह क्रम निश्चित तौर पर लाखों छात्रों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत का परिचायक है। परंतु इस राहत के साथ ही दोहरी चुनौतियों का भी अनावरण हुआ है – डिजिटल सुविधाओं की असमानता और अत्यंत संकीर्ण समय‑सीमा। ग्रामीण एवं पिछड़े इलाकों के कई किशोर इंटरनेट की अनियमित उपलब्धता, अस्थिर डिवाइस या अभ्यस्त नहीं होने के कारण अपनी स्थिति जांचने में ही बाधित हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में बहु‑दिनों के भीतर पुष्टि का आदेश एक अधूरी सामाजिक सुरक्षा जैसा प्रतीत होता है।
बीएसईबी ने बताया कि चयनित छात्रों को अपनी पसंदीदा विद्यालय की पुष्टि के साथ‑साथ ‘स्लाइड‑अप’ (ऊपर की प्राथमिकता में बदलाव) और ‘चॉइस मॉडिफिकेशन’ (विकल्प बदलना) की सुविधा 12 मई तक उपलब्ध होगी। साथ ही सभी विद्यालयों को 13 मई तक अपने डेटा को अद्यतन करना अनिवार्य किया गया है। यह तो प्रशासनिक दक्षता का दावा है, लेकिन बुनियादी आईटी समर्थन, हेल्प‑डेस्क की पहुँच और तकनीकी बाधाओं को लेकर कई ग़ैर‑स्थापित प्रश्न अभी भी बनी हुई हैं।
सामाजिक दृष्टिकोण से देखे तो इस प्रणाली का मूल उद्देश्य समान अवसर प्रदान करना है, परंतु वास्तविकता में यह डिजिटल विभाजन को और गहरा करती दिखती है। बड़े शहरी स्कूलों के पास तेज़ इंटरनेट एवं तकनीकी विशेषज्ञता है, जबकि कई ग्राम्य स्कूलों के पास केवल पुराने कंप्यूटर मौजूद हैं। जब चयन प्रक्रिया ऑनलाइन हो, तो वह अनजाने में ही डिजिटल सुविधा वाले को प्राथमिकता देती है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया की बात करें तो बोर्ड ने अपना कार्य समय पर पूरा किया, परन्तु सूचना संचार की रणनीति और समर्थन संरचना में कमी स्पष्ट है। कई अभिभावकों ने बताया कि वेबसाइट पर बार‑बार सर्वर डाउntime और लॉग‑इन समस्याओं के कारण उन्हें अपनी स्थिति नहीं देख पाई। ऐसे में ‘पुष्टि करना अनिवार्य’ का आदेश व्यावहारिक रूप से अनुचित लगने लगता है।
विस्तारित प्रभाव की दृष्टि से देखा जाए तो यदि चयनित छात्र समय सीमा में पुष्टि नहीं कर पाते, तो न केवल उनका शैक्षणिक सफ़र बाधित होगा, बल्कि अगले बैच के लिए सीटें भी घट सकती हैं। यह असमानता को स्थायी बनाता है और शिक्षा के मौलिक सिद्धांत – ‘समान अवसर, समान परिणाम’ के विरुद्ध जाता है।
समाप्ति में कहा जा सकता है कि बीएसईबी ने डिजिटल माध्यम से चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का कदम जरूर उठाया है, परन्तु इस कदम का वास्तविक लाभ तभी उठाया जा सकेगा जब तकनीकी बुनियाद, समय‑सीमा की लचीलापन, और ग्रामीण‑शहरी डिजिटल अंतर को संपूर्ण रूप से संबोधित किया जाये। नहीं तो यह प्रणाली केवल उसी का सुदृढ़ समर्थन बन कर रहेगी, जिसके पास इंटरनेट की पहुँच औसत रूप से मौजूद है।
Published: May 5, 2026