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Category: समाज

प्रजनन‑उन्मुख तर्कों से समर्थनित प्रस्तावित गर्भपात प्रतिबंध पर सवाल

कई भारतीय राज्य विधानसभाओं ने हाल ही में गर्भपात पर कड़ी पाबंदियों को उचित ठहराया है, यह दावा करके कि यह कदम राज्य की जनसंख्या वृद्धि को तेज करेगा। इस तर्क के पीछे प्रजनन‑उन्मुख, अक्सर भावनात्मक, तर्क छिपे हैं, जबकि वास्तविक कारणों की उपेक्षा की जा रही है।

सामाजिक विज्ञानियों, जनसांख्यिकीय विशेषज्ञों और आर्थिक विश्लेषकों का एक सहयोगी समूह इस नीति‑प्रस्ताव के प्रति तीव्र शंकाएँ व्यक्त कर रहा है। उनका कहना है कि जनसंख्या में गिरावट का प्राथमिक कारण रोजगार‑आधारित प्रवासन, शिक्षा‑सेवा की गुणवत्ताहीनता और बुनियादी स्वास्थ्य‑सुविधाओं की कमी है, न कि गर्भनिरोधक उपायों का विकल्प नहीं होना।

इस प्रस्ताव से सबसे अधिक प्रभावित वर्ग महिलाओं का है, विशेषकर ग्रामीण और निम्न‑आय वर्ग की। गर्भपात पर प्रतिबंध न केवल उनके स्वास्थ्य अधिकारों को घटाता है, बल्कि अनियोजित गर्भधारण, असुरक्षित प्रसव और मातृ-मृत्यु के जोखिम को भी बढ़ाता है। स्वास्थ्य सुविधाओं की अपर्याप्तता को देखते हुए, यह कदम अनिवार्य रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए प्रतिकूल सिद्ध होगा।

राज्य प्रशासन ने इस नीति को "जनसंख्या सुरक्षा" के शीर्षक से प्रस्तुत किया है, परंतु मौजूदा आँकड़े दिखाते हैं कि युवा वर्ग के पलायन का प्रमुख कारण आर्थिक अवसरों की कमी, शिक्षा‑सुविधाओं की अपर्याप्तता और अव्यवस्थित बुनियादी ढाँचा है। अनुसंधानकर्ता बताते हैं कि यदि इन मूलभूत मुद्दों को हल किया जाए तो जनसंख्या स्थिरता की दिशा में स्वाभाविक रूप से सुधार होगा।

वित्तीय वर्ष 2025‑26 की बजट रिपोर्ट में लाभ‑उन्मुख उद्योगों की निर्यात‑प्रेरित नीतियों की कमी, साथ ही कौशल विकास programmes की धीमी प्रगति को उजागर किया गया है। यह स्पष्ट है कि नीति‑निर्माता जनसंख्या को बढ़ाने के लिए सख़्त सामाजिक नियमों की ओर झुकते हैं, जबकि आर्थिक सशक्तिकरण के साधनों को अनदेखा किया जाता है।

सार्वजनिक प्रतिनिधियों का तर्क "जनसंख्या वृद्धि ही आर्थिक विकास का मुख्य चालक" अक्सर व्यंग्य का पात्र बन जाता है, क्योंकि आर्थिक विकास के परिप्रेक्ष्य में जनसंख्या की गुणवत्ता, शिक्षा‑स्तर और स्वास्थ्य‑सुविधाओं का महत्व अधिक सिद्ध होता है। इस प्रकार के संकेतात्मक उपायें, जो मूलभूत संरचनात्मक चुनौतियों को पैरासैटमिक रूप से दवाएं, अंततः एक विफल नीति‑परिणाम बनाते हैं।

वर्तमान में नागरिक समाज के कई संगठनों ने इस प्रस्ताव को चुनौती देने के लिए न्यायिक मार्ग अपनाया है, साथ ही बहुपक्षीय परामर्श के माध्यम से व्यापक सामाजिक सुरक्षा, कौशल‑प्रशिक्षण और रोजगार‑सृजन के उपायों की माँग की जा रही है। यह स्पष्ट है कि प्रशासनिक जवाबदेही केवल अनुबंधित शब्दों में नहीं, बल्कि ठोस कार्यान्वयन में भी अभिव्यक्त होनी चाहिए।

समाप्ति में, यह कहा जा सकता है कि प्रजनन‑उन्मुख तर्कों के पीछे छिपी नीति‑विचारधारा सामाजिक असमानता, स्वास्थ्य‑सुरक्षा की उपेक्षा और प्रशासनिक लापरवाही को छिपा रही है। यदि सरकार सच्चे अर्थ में जनसंख्या वृद्धि को स्थायी बनाना चाहती है, तो उसे आर्थिक अवसर, शिक्षा‑सुविधा और स्वास्थ्य‑सेवा पर प्राथमिकता देनी होगी, न कि बंधक‑सदृश सामाजिक प्रतिबंधों पर।

Published: May 5, 2026