पोर्टलैंड के मॉल‑वॉक समूह ने सार्वजनिक स्वास्थ्य में नई लहर लाई
पोर्टलैंड की एक महिला, क्रिस्टा कैटवूड, ने मज़ेदार व्यायाम का साधन खोजते हुए एक अनौपचारिक मॉल‑वॉक समूह की शुरुआत की। समूह का ‘ड्रेस कोड’ 1980 के दशक की चमक‑दमक वाली पोशाक है, जो युवा व आयुर्वृद्ध सभी वर्गों को आकर्षित करता है। एक वर्ष में इस पहल ने जबरदस्त गति पकड़ी, जिससे स्थानीय शॉपिंग सेंटर न केवल खरीदारी के बल्कि स्वास्थ्य‑सजगता के नए मंच के रूप में उभरे।
ऐसी ही ध्वजधारी पहल भारत में भी अनेक सामाजिक प्रश्न उठाती है। अधिकांश भारतीय शहरों में सार्वजनिक पार्क, ट्रैक या खेल परिसर की कमी है, जिससे नागरिक अपने दैनिक व्यायाम के लिए निजी जिम या महँगे निजी क्लब तक सीमित रह जाते हैं। जबकि शॉपिंग मॉल, जो अपरिचित रूप से बड़े खुले गलियारों से युक्त होते हैं, वहाँ अनौपचारिक योग‑सेशन या फिटनेस समूहों के लिये उपयुक्त जगह मिल सकती है। परन्तु कई नगर निगमों ने इस संभावित सार्वजनिक‑खेल क्षेत्र को नियामक रूप से संभालने में कसरती तौर‑तरीके अपनाए हैं—जैसे कि एसी‑ड्राईवेज़ के लिये ‘व्यायाम प्रतिबंध’ या ‘शोर नियंत्रण’ के अधिकारिक नोटिस—जो व्यायामियों को अनजाने में निरुत्साहित कर देते हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में शहरी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर अलर्ट जारी किया था, परन्तु नीति‑निर्माण में ‘सार्वजनिक व्यायाम स्थल’ को प्राथमिकता नहीं दी गई। परिणामस्वरूप, सामाजिक वर्गों के बीच असमानता और बढ़ रही है; जहाँ उच्च आय वर्ग के पास निजी जिम की पहुँच है, वहीं मध्य‑वर्ग और मजदूर वर्ग को सार्वजनिक स्थानों की अनिश्चित उपलब्धता का सामना करना पड़ता है।
पोर्टलैंड की इस समूह की सफलता इस बात का संकेत देती है कि यदि स्थानीय प्रशासन सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लचीला बना दे, तो समान पहलें भारत में भी फल‑फूल सकती हैं। इस दिशा में नगर परिषदों को ‘खुदरा‑फिटनेस विनियम’ तैयार करने, मॉल‑प्रबंधन को व्यायाम‑सत्रों के लिये समय‑स्लॉट आवंटित करने, तथा सुरक्षा‑संरक्षण के मानकों को स्पष्ट करने की आवश्यकता है। ऐसा न करने पर मौजूदा प्रशासनिक टेम्पलेट खुद ही ‘जिम‑फिटनेस के बड़े सपने’ को झूठा साबित कर देगा।
बिना सजग नीति‑परिवर्तन के, भारत में सामाजिक स्वास्थ्य‑उद्यमिता केवल कुछ ही उद्यमियों के हाथों में रहेगी, जबकि अधिकांश नागरिक ‘व्यायाम‑का अभाव’ की ही स्थिति में रहेंगे। पोर्टलैंड की चमकीली 80‑के दशक की पोशाक शायद दूर की नहीं, बल्कि देश के भीतर ही कई शहरों में अंजाम देने वाले इनुपयुक्त व्यायाम पहल की छटा को प्रज्वलित कर सकती है।
Published: May 5, 2026