पार्क शुल्क नीति में पक्षपात: माताओं की पोस्टनैटल कोयर को क्यों झेलना पड़ रहा है भारी बोझ?
शहर के एक प्रमुख सार्वजनिक पार्क में अपनी पोस्टनैटल कोयर के अभ्यास के लिए समय‑सारणी बनाते हुए एक माताओं के समूह के नेत्री ने पाया कि पेशेवर कुत्ता‑घुमाने वाले वही पार्क कम शुल्क में उपयोग कर रहे हैं। इस अंतर ने उन्हें गहरा आश्चर्य और असंतोष उत्पन्न किया, क्योंकि कोयर के सदस्य अक्सर स्वास्थ्य‑सुधार और सामाजिक जुड़ाव के लिए इस खुले स्थान का सहारा लेते हैं।
कोयर का नेतृत्व करने वाली माताओं ने बताया कि उन्होंने पार्क प्रशासन को शुल्क‑संरचना की जानकारी के लिए लिखित अनुरोध भेजा, परन्तु प्राप्त उत्तर केवल “गतिविधि‑प्रकार के आधार पर विभिन्न दरें लागू हैं” तक सीमित रहा। इस बीच, पेशेवर डॉग वॉकर के संघ ने वही शुल्क‑निर्धारण के तहत अनुबंधित रियायतें प्राप्त कर ली हैं, जिससे सार्वजनिक संसाधनों के नियमन में स्पष्ट असमानता बनी हुई है।
साँचा‑बद्ध रूप से, सार्वजनिक पार्कों का उपयोग न केवल मनोरंजन, बल्कि शिशु‑माताओं के पुनर्वास, शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य, तथा सामुदायिक शिक्षा में अहम भूमिका निभाता है। जब वही स्थान वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए कम दर पर उपलब्ध कराया जाता है, तो सामाजिक असमानता की जड़ें गहरी होती हैं। यह नीति विशेष रूप से निचली आय वर्ग की महिलाओं को असहाय छोड़ देती है, जो अक्सर कम आय वाले परिवारों से जुड़ी होती हैं और अपनी स्वास्थ्य व सामाजिक संकल्पना के लिए सार्वजनिक सुविधाओं पर निर्भर रहती हैं।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया सीमित रही। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि “विभिन्न उपयोग पर विविध शुल्क लागू करना, वित्तीय संतुलन और पार्क के रख‑रखाव को सुनिश्चित करता है”। हालांकि, इस तर्क को सार्वजनिक हित के मानक के साथ मिलाते हुए सवाल उठता है कि क्या आर्थिक लाभ के पीछे सामाजिक जिम्मेदारी पर विचार किया गया है।
इस घटना ने नागरिकों के बीच नीति‑निरूपण और जवाबदेही की मांग को तेज़ कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि नगर निगम को शुल्क‑संरचना को पारदर्शी बनाकर, सभी सामाजिक वर्गों के लिए समान अवसर प्रदान करना चाहिए—ख़ासकर उन समूहों के लिए, जिनका स्वास्थ्य एवं सामाजिक पुनरुज्जीवन सार्वजनिक स्थानों पर निर्भर करता है।
जब तक पार्क शुल्क में स्पष्ट और न्यायसंगत दिशा‑निर्देश नहीं बनते, तब तक माताओं की कोयर जैसे सामाजिक‑स्वास्थ्य पहलों को अनुचित आर्थिक बोझ सहना पड़ेगा, और सार्वजनिक अवकाशस्थलों का मूल उद्देश्य—सभी के लिए समान अभिगम—स्थगित रहेगा।
Published: May 6, 2026