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न्यूरोलॉजिस्ट की पाँच दिमाग़‑सुधार भोजन, भारत में पोषण असमानता की चुनौती
एक प्रमुख न्यूरोलॉजिस्ट ने हाल ही में पाँच खाद्य पदार्थों की सूची प्रकाशित की है, जिन्हें रोज़ाना खाने से मस्तिष्क की कार्यक्षमता बेहतर हो सकती है। इनमें ब्लूबेरी, अखरोट, सैल्मन जैसी वसायुक्त मछली, पत्तेदार सब्जियाँ और अंडे जैसी प्रोटीन‑समृद्ध वस्तुएँ शामिल हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान इनके एंटी‑ऑक्सीडेंट, ओमेगा‑3 फैटी एसिड और विटामिन‑उच्च सामग्री को स्मृति, एकाग्रता और न्यूरो‑डिजेनेरेशन के जोखिम घटाने से जोड़ते हैं।
भारत में इन पोषक‑तत्वों की उपलब्धता कई सामाजिक वर्गों में असमान है। शहरों में सुपरमार्केट में इन वस्तुओं को आसानी से खरीदा जा सकता है, जबकि ग्रामीण या आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए ये खाद्य पदार्थ अक्सर महँगे या उपलब्ध ही नहीं होते। परिणामस्वरूप, दिमाग़‑सुधार के लिए वैज्ञानिक‑आधारित आहार सामाजिक विशेषाधिकार बन जाता है, न कि सार्वभौमिक अधिकार।
वहीं, सरकार ने पोषण सुरक्षा के नाम पर कई पहलें जारी की हैं—पोषण अभियान, मध्याह्न भोजन योजना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) इत्यादि—परंतु इन योजनाओं की प्राथमिकता अभी भी कैलोरी‑संतुलन पर केंद्रित है। विटामिन‑बी, ओमेगा‑3 और एंटी‑ऑक्सीडेंट‑समृद्ध खाद्य पदार्थों को भोजन‑पाठ्यक्रम में शामिल करना अभी तक नीति‑परिचर्च का भाग नहीं बन पाया है।
स्कूल‑कैंटीन और वृद्ध आश्रयस्थलों में बाज़ार की भरोसेमंद सूचियों को अपनाने के बजाय अक्सर सस्ते अनाज‑आधारित भोजन पर निर्भरता बनी रहती है। इस पृष्ठभूमि में, पोषण‑जागरूकता के अभाव और बजट‑सीमा की बहस ने वैज्ञानिक सिफ़ारिशों को सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में परिवर्तित होने से रोका है।
कुछ राज्य सरकारों ने स्थानीय पोषण बागानों, स्कूल‑खाद्य‑उत्पादन क्लबों और 'ब्रेन‑फ़ूड' को सार्वजनिक वितरण प्रणाली में एकीकृत करने के प्रायोगिक कदम उठाए हैं, परन्तु माप‑दण्ड, निगरानी और विस्तृत कार्यान्वयन अभी भी शून्य के करीब है। प्रशासनिक विलंबता और पारदर्शिता की कमी को देखते हुए, यह कहना सुरक्षित रहेगा कि “जब तक मंत्रीगण अपने फॉर्मल जीत के बाद अपनी डेस्क पर बैठकर आरोग्य के जार्गन का अभ्यास नहीं करेंगे, तब तक यह सूची सिर्फ जिम के बैनर पर ही चमकेगी।”
दृष्टिकोण स्पष्ट है: दिमाग़‑सुधार के लिए वैज्ञानिक‑सिद्ध आहार को सार्वजनिक वितरण, स्कूल‑भोजन और वृद्ध‑सेवा कार्यक्रमों में जोड़ने के लिये नीति‑निर्माताओं को स्पष्ट दिशा‑निर्देश, बजटीय आवंटन और जवाबदेह निगरानी तंत्र की आवश्यकता है। तभी इस न्यूरोलॉजिस्ट की पाँच खाद्य सूची का लाभ केवल अभिजात्य वर्ग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत के हर नागरिक के दिमाग़ के स्वास्थ्य की रक्षा में एक ठोस कदम बन सकेगा।
Published: May 9, 2026