दिल्ली में ‘ऑपरेशन मेगा सरज’ के बाद प्रवासियों को घर‑धंधा बचाने की जंग
तीन महीने पहले समाप्त हुए ‘ऑपरेशन मेगा सरज’ के बाद भी दिल्ली के कई प्रवासी अब दैनिक जीवन में सख़्त संघर्ष कर रहे हैं। इस बड़े पैमाने के कार्यवाही‑क्लिप ने सरकारी आदेशों के तहत सड़कों के किनारे और अस्थायी बेसमेंटों में रहने वाले लाखों श्रमिकों को बड़े‑पैमाने पर घर से बाहर निकाल दिया था। अब कई परिवार अपने किराए के घरों को छोड़ने के कगार पर हैं और छोटे‑छोटे व्यापारियों को अपने दाम्पत्य व्यवसाय बंद करने का सामना करना पड़ रहा है।
प्रभावित वर्ग मुख्यतः घरेलू कामगार, निर्माण मजदूर, और खुदरा विक्रेता हैं—जिनका आर्थिक अस्तित्व पहले से ही असुरक्षित था। आधे महीने से अधिक समय तक मिलने वाली राहत राशि में अक्सर पर्याप्त नहीं है, जबकि किराए या व्यावसायिक भाड़े की माँगें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इससे कई को वैकल्पिक आय के साधन खोजने में भी कठिनाई हो रही है, जिससे उनके बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य देखभाल का भी दुरुपयोग हो रहा है।
पश्चात‑संभाल विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा गया है कि “ऑपरेशन का लक्ष्य अनियमित प्रवासन को नियंत्रित करना था, और अब हम पुनर्वास कार्यक्रमों के माध्यम से प्रभावित लोगों को स्थायी घर और रोजगार प्रदान करेंगे।” परन्तु पुनर्वास योजनाओं के लॉन्च की तिथि अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है, और वहीँ से अभागे प्रवासियों को निराशा का नया अध्याय मिल रहा है। यह कथित “स्थायी समाधान” अक्सर कागज़ी आश्वासन बन कर रह जाता है, जबकि जमीन पर असली मदद की कमी स्पष्ट है।
मनोवैज्ञानिक प्रभाव को नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता। कई प्रवासियों ने लंबे समय तक तनाव, अनिद्रा और अवसाद के लक्षण दिखाए हैं, जिनके लिए सशुल्क काउंसलिंग सुविधाएँ नग्न-मुहावरे में “आवश्यक” हैं। अभी तक कोई ठोस योजना या बजट इस दिशा में घोषित नहीं हुआ है, जिससे प्रश्न उठता है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में प्रवासी वर्ग को कितना प्राथमिकता दी जा रही है।
अन्यत्र, नागरिक समाज और मानवाधिकार संगठनों ने प्रशासन को पारदर्शिता, त्वरित राहत और स्थायी पुनर्वास के लिए दबाव बनाया है। उन्होंने अनुरोध किया है कि स्थानीय निकायों को आवासीय क्रय शक्ति के लिए अनुदान और छोटे उद्यमियों को पुनरुद्धार हेतु आसान ऋण उपलब्ध कराए जाएँ। इन मांगों के बावजूद, वर्तमान उपायों में मुख्यतः “एक बार की राहत” पर ज़ोर दिया जा रहा है, जो दीर्घकालिक अस्थिरता को मात्र अस्थायी धुंधला कर देता है।
‘ऑपरेशन मेगा सरज’ की नीति‑कार्यान्वयन में स्पष्टता की कमी, राहत के तंत्र में अकार्यकारिता और सामाजिक सुरक्षा जाल के टूटने से उत्पन्न समस्याएँ यह दर्शाती हैं कि बड़े‑पैमाने पर प्रवासी प्रबंधन में प्रशासनिक अनदेखी कितनी बड़ी लागत लाता है। जनता के अधिकार, सुरक्षित आवास और मानवीय गरिमा के मूलभूत सिद्धांतों को पुनर्स्थापित करना तभी संभव है, जब नियामक संस्थाएँ अपने ही बंधनों को पहचानें और शीघ्रता से कार्यवाही करें।
Published: May 5, 2026