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दूरस्थ परामर्श से गर्भनिरोधक गोली तक पहुँच: नीति‑संकट में मिफ़ेप्रिस्टोन
अमेरिकी अदालतों में चल रहे मुक़दमों का प्रतिध्वनि भारत तक पहुँच गई है। दो गोलियों वाली दवा—मिफ़ेप्रिस्टोन—का टेलीमेडिसिन माध्यम से वितरण बंद करने की सम्भावना, स्वास्थ्य‑सुविधा के क्षेत्र में नयी बहस को जन्म देती है। जबकि इस मुद्दे की जड़ें विदेश में हैं, परन्तु इसका सामाजिक‑स्वास्थ्य प्रभाव हमारे ग्रामीण, कमजोर वर्गों की असमानता को उजागर करता है।
भारत में मेडिकल गर्भपात को गर्भपात अधिनियम (MTP) 1971 के तहत नियमन किया गया है, और हाल ही में सेंसरशिप‑मुक्त इंटरनेट और टेलीहेल्थ की सुविधा को बढ़ावा देने के लिये राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन (NDHM) ने कई दिशानिर्देश जारी किए हैं। फिर भी, निवारक उपायों की व्याख्या में प्रमुख नियामक—ड्रग कंट्रोल जनरल इंटीग्रेटेड (DCGI) तथा राज्य स्वास्थ्य विभाग—की अनिर्णयता, महिलाओं को अनावश्यक कठिनाइयों में डालती है।
टेलीमेडिसिन द्वारा मिफ़ेप्रिस्टोन की पहुँच का समर्थन करने वाली पेशेवर संघों ने कहा है कि यह सुविधा विशेषकर दूर‑दराज़ इलाकों में रहने वाली महिलाओं को, जिनके पास तुरंत डॉक्टर‑परामर्श नहीं है, सुरक्षित विकल्प प्रदान करती है। दूसरी ओर, कुछ प्रशासनिक स्तर पर ‘दुर्लभता’ और ‘दूरस्थ संकेत’ को लेकर संकोच बना हुआ है, जिससे प्रतिभागी डॉक्टरों को टेली‑प्रिस्क्रिप्शन की अनुमति नहीं मिलती। इस असंगत नीति‑भेदभाव को कई सामाजिक संगठनों ने ‘स्वास्थ्य‑अधिकार का हनन’ कहा है।
वास्तविकता यह है कि टेलीहेल्थ सेवाओं की बढ़ती मांग के साथ, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की क्षमताएँ भी दायित्वपूर्ण हो गई हैं। यदि सरकार द्वारा पेशेवर संकेतकों को सीमित किया जाता है, तो न केवल रोगी‑केंद्रित देखभाल बाधित होगी, बल्कि अनियंत्रित वैकल्पिक बाजारों के विकास की संभावनाएँ भी बढ़ेंगी—जो निरुपद्रवित प्रतिकूलता के समान ही अनुशासनहीनता पेश करती है।
संकट के समाधान में स्पष्ट नियामक ढाँचा और समयबद्ध दिशानिर्देश आवश्यक हैं। प्रशासन को निरंतर बदलावों के साथ तालमेल बिठाते हुए, “सुरक्षित, सुलभ और समय पर” स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए, न कि प्रत्येक नई तकनीकी‑आधारित सेवा पर संदेह की नींव रखनी चाहिए। इस प्रकार, टेलीमेडिसिन के माध्यम से मिफ़ेप्रिस्टोन की उपलब्धता को निलंबित कर, नीति‑निर्माण में ‘स्मार्ट’ नहीं, बल्कि ‘संरक्षित’ कहा जाने वाला अपर्याप्त उत्तर देना, भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य के भविष्य की स्थिरता को अपरिवर्तनीय रूप से कमजोर कर देगा।
Published: May 8, 2026