तेलंगाना में आईसीईटी 2026 के हॉल‑टिकट जारी, छात्रों को प्रिंट व फोटो‑आईडी अनिवार्य
तेलंगाना काउंसिल ऑफ हायर एजुकेशन (TGCHE) ने आज (4 मई 2026) अपने आधिकारिक पोर्टल icet.tgche.ac.in पर आईसीईटी‑2026 के हॉल‑टिकट जारी कर दिए। इस साल की प्रवेश परीक्षा 13 और 14 मई को दो शिफ्ट में आयोजित होगी – सुबह 10:00 से 12:30 वजे और दोपहर 2:30 से 5:00 वजे।
आवेदनकर्ता को अपने पंजीकरण क्रमांक, पूर्व परीक्षा का हॉल‑टिकट नंबर और जन्मतिथि दर्ज कर टिकेट डाउनलोड करना होगा। नियम स्पष्ट है: ऑनलाइन डाउनलोड के बाद टिकेट का प्रिंट आउट एवं वैध फोटो‑आईडी (आधार, पैन या ड्राइविंग लाइसेंस) परीक्षार्थी को परीक्षा स्थल पर अनिवार्य प्रस्तुत करना पड़ेगा।
छात्र वर्ग के लिए यह सूचना दो‑प्लेटिनम मुद्दा बन गया है। एक ओर डिजिटल सुविधाओं के अभाव में कई ग्रामीण aspirants को टिकेट डाउनलोड करने के लिए इंटरनेट कफ़े या सार्वजनिक कंप्यूटर पर निर्भर रहना पड़ता है; दूसरी ओर प्रिंटर की अनुपलब्धता या आर्थिक सीमाओं के कारण टिकेट को प्रिंट कराना अभी‑भी एक बोझ बन गया है। प्रशासन को इससे जुड़ी समस्याओं का पूर्वानुमान लगाना चाहिए था, पर ऐसा प्रतीत होता है कि आधिकारिक घोषणा के साथ “आवश्यक दस्तावेज़” की शर्तें पहले से ही आधी‑सिर पर रखी गई थीं – जैसे-जैसे डेस्क पर पेन रखी जाती है, वैध फोटो‑आईडी की आवश्यकता याद दिलाई जाती है।
पिछले साल के कई रिपोर्टों में यह उजागर हुआ था कि टिकेट के तकनीकी त्रुटियों, डुप्लिकेट रिकॉर्ड और लॉग‑इन समस्याओं के कारण छात्रों को निराशा झेलनी पड़ी। इस बार TGCHE ने “जाँच चरण” को तेज़ करने का वादा किया है, लेकिन नीति‑निर्माण में वही पुरानी लकीरें – “डिजिटल पोर्टल खुलेगा, फिर प्रिंटआउट लेंगे” – दोहराई जा रही हैं।
समाज के व्यापक हिस्से के लिए यह परीक्षा केवल एक प्रवेश प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक गतिशीलता का प्रमुख साधन है। यदि टिकेट जारी करने की प्रक्रियाएँ या परीक्षा स्थल पर आईडी जांच में अति‑कठोरता दिखे, तो उन छात्रों का भविष्य ही नहीं, बल्कि राज्य की मानव‑पूँजी विकास भी प्रभावित होगी। प्रशासनिक लापरवाही को पहचानते हुए, कई शैक्षणिक संस्थानों ने छात्र‑संघों को सलाह दी है कि वे तत्काल प्रिंटेड टिकेट और फोटो‑आईडी तैयार कर लेकर न रखें तो ही नज़रंदाज़ न करें।
निरंकुश रूप से कहा जाए तो “हॉल‑टिकट जारी” शब्द के साथ प्रशासन ने एक और बार यह सिद्ध किया कि नीतियों का निर्माण अक्सर कागज़ी ढाँचा बन जाता है, जबकि उनके कार्यान्वयन में जमीन‑स्तर की बाधाओं को अनदेखा किया जाता है। इस विफलता को सुधारने के लिए केवल “डिजिटल घोषणा” नहीं, बल्कि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को वास्तविक सुविधा प्रदान करने वाले ठोस कदमों की आवश्यकता है।
Published: May 4, 2026