डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय ने इवन सेमेस्टर 2026 के एडेइट कार्ड जारी, छात्रों को डिजिटल असुविधा का सामना
ड्र. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय (AKTU) ने 2026 के इवन सेमेस्टर की परीक्षाओं के लिए एडेइट कार्ड (हॉल टिकेट) जारी कर दिया। यह घोषणा विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट aktu.ac.in पर की गई, जहाँ से छात्र अपने रोल नंबर के आधार पर कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। परीक्षाओं की अवधि 7 मई से 7 जून तय हुई है और प्रत्येक छात्र को परीक्षा केन्द्र पर एडेइट कार्ड अवश्य साथ ले जाना अनिवार्य है।
हालांकि डिजिटल माध्यम से कार्ड डाउनलोड करने की प्रक्रिया तेज़ और पारदर्शी दिखती है, पर वास्तविकता में कई छात्रों को बुनियादी इंटरनेट पहुँच, स्थिर कनेक्शन और उपकरणों की कमी से जूझना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों और पिछड़े वर्गों के कई अभ्यर्थी अभी भी द्वितीयक इंटरनेट पर निर्भर हैं, जहाँ नेटवर्क ड्रॉप और साइट लैग सामान्य बात बन चुकी है। इस परिस्थिति में विश्वविद्यालय के पोर्टल पर ट्रैफ़िक के अचानक बढ़ने पर अक्सर सर्वर समय‑समय पर क्रैश हो जाता है, जिससे छात्रों को सही समय पर एडेइट कार्ड प्राप्त करना जोखिमपूर्ण हो जाता है।
शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने के कर्तव्य के तहत, विश्वविद्यालय ने इस डिजिटल पहल के लिए एक हेल्पलाइन और ई‑मेल संपर्क उपलब्ध कराया है, पर यह सहायता अक्सर उत्तर देने में देर कर देती है। कई छात्र और अभिभावक इस बात का सवाल उठा रहे हैं कि क्या दो‑स्तरीय प्रणाली – ऑनलाइन डायलॉग और पारंपरिक काउंटर सुविधा – को साथ‑साथ लागू करना नहीं चाहिए, जिससे प्रत्येक वर्ग को समान अवसर मिल सके।
एडेइट कार्ड न होने पर परीक्षा में बैन हो जाने की सम्भावना छात्रों के भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। यह मुद्दा केवल एक तकनीकी तुच्छता नहीं, बल्कि शैक्षणिक असमानता को उग्र करने वाला एक कारक बन चुका है। प्रशासन को अब त्वरित कदम उठाते हुए, मोबाइल‑फ़्रेंडली वैकल्पिक डाउनलोड विकल्प, स्थानीय सूचना केंद्रों पर थर्ड‑पार्टी प्रिंटिंग व्यवस्था, और साइट स्थिरता को बढ़ाने के लिए क्लाउड‑आधारित सर्वर पर स्विच करने की आवश्यकता है।
समग्र रूप से, AKTU की एडेइट कार्ड जारी करने की पहल सराहनीय है, पर इसके कार्यान्वयन में मौजूदा डिजिटल अंतराल ने एक बार फिर शैक्षणिक नीति में समावेशी सोच की कमी को उजागर किया है। छात्रों की परीक्षा‑पूर्व तैयारी के साथ-साथ उनका मानसिक तनाव भी इस प्रणालीगत विसंगति से बढ़ रहा है, जिसका समाधान केवल तकनीकी अपडेट से नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता और समयबद्ध संवाद से ही संभव है।
Published: May 5, 2026