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Category: समाज

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छत्तीसगढ़ प्री‑इंजीनियरिंग टेस्ट 2026 का एडमिट‑कार्ड जारी, छात्रों को प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल

छत्तीसगढ़ राज्य के प्री‑इंजीनियरिंग टेस्ट (CG PET) के 2026 एडमिट‑कार्ड आधिकारिक पोर्टल vyapamcg.cgstate.gov.in पर उपलब्ध कराए गये हैं। उम्मीदवार अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर और पासवर्ड का उपयोग करके हॉल‑टिकट डाउनलोड कर सकते हैं और उसे प्रिंट कर परीक्षा में पेश कर सकते हैं। यह परीक्षा राज्य के सभी मुख्य इंजीनियरिंग कॉलेजों में बी‑टेक प्रोग्राम के प्रवेश के लिये निर्णायक भूमिका निभाती है।

डिजिटल माध्यम से त्वरित वितरण को प्रशंसा के योग्य कहा जाता है, परंतु इस प्रक्रिया में कई सामाजिक असमानताएं उजागर होती हैं। ग्रामीण एवं कम‑आबादी वाले क्षेत्रों में इंटरनेट पहुँच और समुचित स्मार्ट‑डिवाइस की उपलब्धता अभी भी कुछ छात्रों के लिये बाधा बनी हुई है। कई बार अंतिम क्षण में जारी होने वाले लिंक के कारण उम्मीदवारों को डाउनलोड, प्रिंट और दोबारा जाँच करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता, जिससे तनाव में वृद्धि होती है।

पिछले वर्षों में एडमिट‑कार्ड जारी होने में देरी या तकनीकी गड़बड़ी की शिकायतें कई बार सामने आई थीं। इस बार भी कुछ उम्मीदवारों ने पोर्टल पर लॉग‑इन त्रुटियों की खबरें दीं, जिससे स्पष्ट होता है कि तकनीकी बुनियाद पर मामला अभी भी पक्का नहीं है। ऐसी परिस्थितियां न केवल छात्रों की परीक्षा‑तैयारी में बाधा डालती हैं, बल्कि प्रशासनिक उत्तरदायित्व पर प्रश्न उठाती हैं कि डिजिटल सेवाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिये कौन से कदम उठाए गये हैं।

वहीं, एजुकेशन विभाग ने यह बताया है कि हॉल‑टिकट में नाम, रोल नंबर, परीक्षा केंद्र, तारीख और समय सहित सभी आवश्यक विवरण स्पष्ट रूप से लिखे गये हैं, और उम्मीदवारों को फ़ॉलो‑अप के लिये आधिकारिक हेल्पलाइन उपलब्ध कराई गयी है। लेकिन यह भी कहा गया है कि समस्या समाधान में अक्सर कई दिन लगते हैं, जबकि परीक्षा के निकटतम समय में तेज़ जवाबदेही की आवश्यकता होती है।

सामाजिक दृष्टिकोण से देखा जाये तो प्रवेश प्रक्रिया में तकनीकी सुविधा, सूचना‑सुरक्षा और समयबद्धता को एक साथ संभालना नीतियों की दक्षता का परीक्षा पत्र है। यदि डिजिटल विभाजन को दूर करने के लिये अतिरिक्त सहायता, जैसे ग्रामीण आयुक्तों के माध्यम से एडमिट‑कार्ड का प्रिंट‑आउट या मोबाइल‑आधारित सूचना‑सुरक्षा केंद्रों की स्थापना नहीं की जाये, तो इस प्रक्रिया में निरन्तर असमानता बनती रहेगी।

भविष्य में ऐसे महत्वपूर्ण परीक्षा‑परियोजनाओं के लिये एक व्यापक, बहु‑स्तरीय और समावेशी डिजिटल रणनीति की आवश्यकता है, जिससे सभी वर्गों के छात्रों को समान अवसर मिल सके और प्रशासनिक लापरवाही से बचा जा सके। तभी प्रवेश‑प्रक्रिया न केवल पारदर्शी बल्कि न्यायसंगत भी बन पाएगी।

Published: May 7, 2026