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Category: समाज

गुजरात बोर्ड की 2026 हाई स्कूल परिणाम: विज्ञान में 84.33% पास, सामान्य में 92.71%

गुजरात माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (GSHSEB) ने इस साल कक्षा‑12 के अंतिम परिणाम जारी कर 84.33% की विज्ञान स्ट्रीम पास दर और 92.71% की सामान्य स्ट्रीम पास दर दर्ज की। विज्ञान स्ट्रीम का यह प्रतिशत 2016 के बाद से सर्वोच्च है, जबकि सामान्य स्ट्रीम की दर पिछले वर्ष की तुलना में थोडी गिरावट दर्शाती है।

कुल 4.35 लाख छात्र सामान्य स्ट्रीम की परीक्षाओं में बैठे, जबकि विज्ञान स्ट्रीम में सहभागिता का आँकड़ा पिछले दो वर्षों से स्थिर रहा। परिणामों में जिले‑दराज़ स्पष्ट असमानताएं दिखाई दीं: मोरबी ने विज्ञान में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, वहीं दाहोद ने सबसे कम पास प्रतिशत दर्ज किया। सामान्य स्ट्रीम में कई केंद्रों ने 100% परिणाम प्राप्त कर शैक्षणिक शुद्धता का प्रदर्शन किया, परन्तु उन केंद्रों की संख्या असमान वितरण को संतुलित नहीं कर पायी।

शिक्षा नीति के प्रमुख दावों के अनुसार, गुणवत्तापूर्ण और समान शैक्षिक अवसर प्रदान करना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। परन्तु दाहोद जैसे पिछड़े क्षेत्रों में अभी भी बुनियादी उपकरण, योग्य अध्यापक और डिजिटल सीखने की सुविधाओं की कमी है, जिससे छात्रों की उपलब्धि पर असर पड़ता है। यह असमानता केवल सांख्यिकीय अंतर नहीं, बल्कि सामाजिक असमानता की दिशा में एक चेतावनी है।

परिणाम घोषणा के बाद बोर्ड ने शिक्षकों के समर्पण और छात्रों की मेहनत की सराहना की, साथ ही मौजूदा कमजोरियों को दूर करने के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण और संसाधन वितरण का वादा किया। वास्तविकता यह है कि अधिकतर समय इन वादों का कार्यान्वयन धुंधला रहता है; जैसे परीक्षा के जवाब में अंक दर्शाए जाते हैं, वैसे ही प्रशासनिक जवाबदेही अक्सर “शून्य” पर ही रुकती है।

माता‑पिता और छात्र, जो परीक्षा के तनाव से निकल कर भविष्य की दिशा तय करने के लिए उत्सुक हैं, अब इन आंकड़ों को केवल अंक नहीं, बल्कि नीति‑निर्माताओं के कार्य‑प्रभाव की कसौटी मान रहे हैं। यदि उच्च पास दर को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाये रखना है, तो प्रदेश‑व्यापी समानता, विशेषकर विज्ञान शिक्षा में, निरंतर निगरानी और ठोस कार्य‑योजना के बिना अधूरी रह जाएगी।

Published: May 4, 2026