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Category: समाज

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कोल इंडिया के 660 प्रबंधन प्रशिक्षु पदों की भर्ती, केवल कंप्यूटर टेस्ट पर आधारित चयन

भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े नियोक्ता कोयला भारत लिमिटेड ने 660 प्रबंधन प्रशिक्षु (ई‑1 ग्रेड) पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया का आह्वान किया है। आवेदन 12 मई 2026 से शुरू होंगे और चयन केवल कंप्यूटर‑आधारित ऑनलाइन टेस्ट (CBT) के माध्यम से होगा, जिसमें साक्षात्कार या किसी अतिरिक्त मूल्यांकन चरण का प्रावधान नहीं है।

इस प्रशिक्षण अवधि के दौरान नियुक्ति वाले कर्मचारियों को ₹60,000 से ₹1,80,000 तक का वेतन मिलेगा, जो भारत के औद्योगिक क्षेत्र में शुरुआती स्तर के लाभ के संदर्भ में प्रतिस्पर्धी माना जा रहा है। पात्रता के मानक सरल हैं: भारतीय नागरिक, स्नातक डिग्री धारी और आयु 30 वर्ष या उससे कम।

जबकि अवसर की प्रशंसा की जा रही है, नीति निर्माताओं और सामाजिक विश्लेषकों ने इस प्रक्रिया के दो पहलुओं पर प्रकाश डाला है। पहला, केवल ऑनलाइन टेस्ट पर निर्भरता का अर्थ है कि चयन के मानकों में गहराई और बहुपक्षीयता की कमी रह सकती है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि साक्षात्कार की अनुपस्थिति से अभ्यर्थियों के नेतृत्व, संवाद कौशल और वास्तविक कार्यस्थल व्यवहार का मूल्यांकन संभव नहीं हो पाता, जो प्रबंधकीय भूमिकाओं में महत्वपूर्ण होते हैं।

दूसरा, इस भर्ती के सामाजिक प्रभाव को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखी गई है। युवा वर्ग, विशेषकर ग्रामीण और उपनगरीय क्षेत्रों के आवासीय क्षेत्रों में, इसे एक मूल्यवान रोजगार अवसर के रूप में देखते हैं। वहीं, समान अवसर सिद्धांत के संदर्भ में यह सवाल उठता है कि क्या इस इलेक्ट्रॉनिक-प्रथम चयन पद्धति से डिजिटल असमानता के कारण कुछ वर्गों को अवसर से वंचित किया जा रहा है।

प्रशासनिक दृष्टिकोण से यह पहल सार्वजनिक-sector नौकरियों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखी जा सकती है, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि प्रक्रिया में पारदर्शिता और समावेशिता को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। जैसा कि अक्सर कहा जाता है, ‘जब तक स्क्रीन पर कर्सर चलता है, तब तक प्रक्रिया समाप्त हो गई’; इस संकेत से यह स्पष्ट होता है कि तकनीकी सुविधा के साथ-साथ मानवीय पहलू को भी समान महत्व देना चाहिए।

अंत में, कोयला भारत लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित प्रशिक्षण अवधि और वेतन पैकेज युवा पेशेवरों को सार्वजनिक क्षेत्र में आकर्षित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। फिर भी, ऐसी भर्ती नीतियों को सामाजिक समानता, व्यावसायिक विविधता और वास्तविक कार्य क्षमताओं के समुचित मूल्यांकन के साथ संतुलित करना ही सरकार की जवाबदेही एवं नीति‑क्रियान्वयन की सच्ची परीक्षा होगी।

Published: May 7, 2026