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केरल के छात्रों ने जेईई मेन 2026 में चार पूर्ण अंक; शिक्षा प्रणाली में उजागर असमानताएँ
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने जेईई मेन 2026 के सत्र‑2 के पेपर‑2 के परिणाम जारी किए। बॅचलर ऑफ आर्किटेक्चर (BArch) और बॅचलर ऑफ प्लानिंग (BPlanning) में क्रमशः दो‑दो छात्रों ने 100 प्रतिशताइल तक पहुंच कर पूरे‑पूरे अंक प्राप्त किए। इन चार विद्यार्थियों में मीरा कृष्णा आर एस, सूर्यतेजस एस (BArch) और गोवरी शंकर वी, सार्थक अग्रवाल (BPlanning) शामिल हैं, जिनमें से अधिकांश केरल के रहने वाले हैं।
परिणाम के आंकड़े मौलिक प्रश्न उठाते हैं: दोनों शाखाओं में कुल 94,000 से अधिक छात्रों ने BArch के लिए और 45,000 से अधिक ने BPlanning के लिए पंजीकरण किया। लाखों aspirants के बीच केवल चार ही पूर्ण अंक हासिल कर सके, जो परीक्षा‑केंद्रित शिक्षा नीति की दरारों को साफ़ दर्शाता है।
ऊँचे‑ऊँचे अंक, सीमित सीटें, और परीक्षा‑पर्याप्ती पर अत्यधिक निर्भरता ने समाज के कई वर्गों को किनारे पर धकेल दिया है। शहरी‑पेंशन वाले अभ्यर्थी डिजिटल बुनियादी ढाँचे, विशेष ट्यूशन और वैद्यकीय मदद का लाभ ले सकते हैं, जबकि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सीमित संसाधनों, असुरक्षित इंटरनेट कनेक्शन और अपर्याप्त काउंसलिंग का सामना करना पड़ता है।
प्रशासनिक दृष्टि से NTA ने बड़े डेटा‑ड्रिवेन मूल्यांकन को लागू किया, फिर भी तकनीकी गड़बड़ी, प्रश्न‑पत्र वितरण में असंगतियाँ और परिणाम घोषणा में देरी जैसी समस्याएँ अक्सर सामने आती हैं। इस बार तेज़ी से परिणाम घोषित करने का दावा किया गया, परंतु कई उम्मीदवारों को ऑनलाइन पोर्टल पर लॉग‑इन त्रुटियों और मेरिट लिस्ट की पारदर्शिता पर सवालों का सामना करना पड़ा।
परिणामों की घोषणा के बाद शिक्षा मंत्रालय ने ‘अंतर्वैयक्तिक असमानताओं को घटाने’ की नीति की बात दोहराई, परंतु वास्तविक कार्यान्वयन में अभी भी अंतराल बने हुए हैं। सरकारी योजना ‘स्कूल‑टू‑स्टूडेंट’ के तहत विशेष रेज़िडेंशियल क्वोटा, काउंसलिंग सहायता और सामुदायिक लैब्स की प्रणाली अभी प्रारंभिक चरण में है, जिससे तत्काल प्रभाव की उम्मीद सीमित रहती है।
समाज में इस अभूतपूर्व सफलता को सराहते हुए, यह सत्य नहीं छिपाया जा सकता कि केवल चार छात्रों का चमकदार परिणाम शिक्षा प्रणाली के व्यापक दुविधा‑परक माहौल को नहीं बदल सकता। यदि नीति-निर्माताओं को असमान अवसरों को सच‑मुच कम करना है, तो उन्हें परीक्षा‑आधारित चयन के साथ-साथ निरन्तर मूल्यांकन, साक्षरता‑बढ़ाव और स्कीमरहित तकनीकी बुनियादी ढाँचा बनाया जाना आवश्यक है। नहीं तो अगली बार भी वही शीर्षक‑संकट और ‘सिर्फ़ कुछ ही सितारे चमकेंगे’ वाला परिदृश्य दोहराता रहेगा।
Published: May 7, 2026