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Category: समाज

केरल के कोधिनी में असामान्य जुड़वाँ जन्म दर: सामाजिक, स्वास्थ्य और प्रशासनिक चुनौतियाँ

केरल राज्य के कोधिनी गाँव को हाल ही में ‘जुड़वाँ शहर’ के रूप में पहचान मिली है। यहाँ हर हज़ार जन्म में लगभग तीस‑पाँच जुड़वाँ होते हैं, जो भारत के राष्ट्रीय औसत (लगभग 16‑18 प्रति हज़ार) और विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त आंकड़ों से कई गुना ऊपर है। यह आँकड़ा न सिर्फ वैज्ञानिकों को उलझन में डालता है, बल्कि स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य प्रणाली पर नई चुनौतियाँ भी खड़ी करता है।

कोधिनी में जुड़वाँ जन्म को एक विशेष सामाजिक घटना माना जाता है। हर साल द्विधा उत्सव का आयोजन होता है, जिसमें जुड़वाँ बच्चों को सम्मानित किया जाता है, गीत‑नृत्य और स्थानीय व्यंजन से माहौल सजीव हो जाता है। इस उत्सव ने तो गाँव की पहचान ही नहीं बना दी, बल्कि पर्यटन की संभावनाओं को भी उजागर कर दिया है। जबकि इस तरह की सांस्कृतिक झलकें सामाजिक बंधन को मजबूत करती हैं, वहीं यह सवाल उठता है कि क्या इस उत्सव के पीछे की उत्सुकता, ठोस स्वास्थ्य‑संबंधी मजबूती में बदल पाई है?

जुड़वाँ बच्चों के लिए विशेष शिशु‑देखभाल, स्तनपान समर्थन और समय पर वैक्सीनेशन आवश्यक है। कोधिनी की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की कमी, बेबी हस्पिस के सीमित उपकरण, और टेरिटरी‑लेवल डेटा संग्रह की अनियमितता ने इस समूह को जोखिम में डाल दिया है। कई माताएँ बताते हैं कि दो बच्चों को एक साथ संभालना आर्थिक बोझ बन गया है, जबकि सरकारी सहायता योजनाओं की पहुँच में अक्सर अस्पष्टता रहती है।

ऐसे में राज्य‑स्तर की स्वास्थ्य नीतियों की समीक्षा आवश्यक हो गई है। जबकि केरल ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में देश‑भर में सराहा गया मॉडल स्थापित किया है, कोधिनी जैसे ‘हॉटस्पॉट’ में लक्षित अनुसंधान और संसाधन आवंटन अभी तक नहीं हुआ है। वैज्ञानिकों ने इस अनोखी जनसंख्या में आनुवंशिक, पर्यावरणीय और सामाजिक कारकों का अध्ययन करने का प्रस्ताव रखा है, परन्तु वित्तीय समर्थन और प्रशासनिक त्वरित कार्रवाई अभी भी क्षुद्र प्रतीत होती है।

स्थानीय प्रशासन ने उत्सव के दौरान स्वास्थ्य बूथ लगाए और स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करने की घोषणा की है, परन्तु यह कदम अक्सर “उत्सव के बाद अवकाश” की श्रेणी में गिर जाता है। इस प्रकार के ‘संवेदनात्मक रूप‑राखता’ वाले उपायों को नीतियों में स्थायी रूप से समाहित करना आवश्यक है, नहीं तो यह केवल ‘इवेंट‑विशिष्ट’ समाधान बना रहेगा।

कोधिनी की स्थिति सामाजिक असमानता की भी द्योतक है। जबकि शहर‑केन्द्रित वर्गों को टेलीकॉम, डिजिटल स्वास्थ्य‑सहायता और निजी सुविधाओं का लाभ मिलता है, गाँव के अधिकांश निवासी अभी भी बुनियादी स्वच्छता, प्रसवपूर्व देखभाल और आर्थिक सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस असामान्य जनसंख्या पर केंद्रित नीतियों की कमी, उनके मूलभूत अधिकारों के प्रति प्रशासन की उदासीनता को उजागर करती है।

बहुप्रतिक्षित अनुसंधान, पर्याप्त बजट आवंटन और सतत स्वास्थ्य‑सेवा मॉडल के बिना, कोधिनी की जुड़वाँ उत्पत्ति एक सांस्कृतिक आकर्षण से अधिक बन जाएगी—एक अनसुलझी समस्या जो भारत के स्वास्थ्य‑नीति पर प्रश्नचिह्न लगा देती है। यदि सरकार इस अति‑जुड़वाँ दर को केवल “पर्यटन का अवसर” समझ कर चलती रहती है, तो वह सामाजिक जवाबदेही के मूल सिद्धान्त से दूर हो जाएगी।

Published: May 6, 2026