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कैंब्रिज समर्पित शिक्षक पुरस्कार 2026 में भारतीय विज्ञान शिक्षक सॉमा मंडल को मिला दक्षिण एशिया खिताब
कैलंडर विश्व विद्यालय द्वारा आयोजित कैंब्रिज समर्पित शिक्षक पुरस्कार 2026 के दक्षिण एशिया खंड में भारतीय विज्ञान शिक्षक सॉमा मंडल का नाम शिरोमणि बनाकर उभरा। पर्यावरणीय समस्याओं और जलवायु परिवर्तन पर छात्रों को सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए उनके अभिनव प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सराहा गया।
भले ही यह मान्यता व्यक्तिगत साधन‑साधन से प्राप्त हुई हो, यह भारतीय विद्यालयीय प्रणाली की व्यापक समस्याओं को छिपाए नहीं रखती। देश के अधिकांश सरकारी स्कूलों में जलवायु शिक्षा को पढ़ाते‑लिखाते कक्षा के मौसम नियंत्रण तक की सुविधा नहीं मिलती। शहरी‑ग्रामीण अंतर के कारण शहरों की प्री‑स्कूल से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक जितनी सामग्री उपलब्ध है, ग्रामीण क्षेत्रों में वह अक्सर कल्पना तक नहीं पहुँचती।
ऐसे में एक व्यक्तिगत उत्कृष्टता को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिलने से नीति‑निर्माताओं को असहाय न बनाते हुए, यह सवाल उठता है कि क्या उन नीतियों में बदलाव की गति पुरस्कार समारोह के जितनी ही तेज़ होगी। सरकार ने हाल ही में राष्ट्रीय जलवायु शिक्षा योजना की घोषणा की, परन्तु बजट आवंटन, शिक्षकों का प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम में वास्तविक एकीकरण अभी तक धुंधले योजना‑भांडार में जमे हैं।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय शिक्षक की सफलता से शैक्षणिक संस्थानों को अपना बूटस्ट्रैप मॉडल अपनाने की आशा है, परन्तु ऐसा तभी संभव होगा जब स्कूलों को बुनियादी सुविधाएँ—पुस्तकें, प्रयोगशालाएँ, और प्रौद्योगिकी—प्रदान करने में प्रशासनिक लापरवाही नहीं दोहराई जाएगी। अभी भी ऐसा माहौल बना हुआ है जहाँ “आधुनिकीकरण” शब्द को वार्षिक रिपोर्ट में चमकीला बनाया जाता है, पर वास्तविक कार्य‑स्थल में धूल‑धुंधली राहें ही बची रहती हैं।
सॉमा मंडल की इस उपलब्धि ने न केवल छात्रों के मन में जलवायु चेतना के बीज बोए हैं, बल्कि यह भी प्रदर्शित किया है कि सही उत्प्रेरक से शिक्षण पद्धति कितनी प्रभावी हो सकती है। अब समय है कि नीति‑निर्माताओं, शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच इस एकल सफलता को एक सामूहिक आंदोलन में परिवर्तित किया जाए, ताकि भविष्य की पीढ़ी को केवल पुरस्कार‑सूची में नहीं, बल्कि वास्तविक कार्यशैली में बदलाव का लाभ मिल सके।
Published: May 7, 2026