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Category: समाज

केन्या की AI‑आधारित स्वास्थ्य योजना ने गरीबों की लागत बढ़ा दी, नीति‑निर्माताओं के लिए चेतावनी

केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूतो ने अक्टूबर 2024 में एक नई स्वास्थ्य‑सुधार योजना की घोषणा की, जिसका उद्देश्य दशकों पुराने राष्ट्रीय बीमा प्रणाली को बदलकर हर नागरिक को अनिवार्य स्वास्थ्य‑सेवा प्रदान करना था। योजना का मुख्य तत्व एक कृत्रिम‑बुद्धिमत्ता (AI) एल्गोरिदम था, जो प्रत्येक परिवार की आर्थिक क्षमतानुसार उनके लिये कटौती‑योग्य प्रीमियम निर्धारित करता था।

हालिया जांच से पता चला कि वही एल्गोरिदम गरीब वर्ग की भुगतान क्षमता को कम आंक रहा है, जिससे उनकी स्वास्थ्य‑सेवा की लागत में असामान्य वृद्धि हो रही है। जबकि उच्च आय वाले परिवारों को न्यूनतम प्रीमियम पर लाभ मिल रहा था, निचले आय वर्ग को अक्सर असहनीय राशि चुकानी पड़ रही थी, जिससे मूलभूत उपचार भी अप्राप्य बन रहा है।

समीक्षक कहते हैं, “ऐसा लगता है कि एल्गोरिदम ने भी कंगाली को पढ़ना सीख लिया है—वह जहाँ‑जहाँ गरीबों की जान बचाने वाले डेटा देखता है, वहीं वह खर्च को दो गुना कर देता है।” इस प्रणाली की तकनीकी पारदर्शिता की कमी, डेटा सेट में मौजूदा सामाजिक‑आर्थिक पक्षपात, तथा स्वचालित मूल्य निर्धारण पर अपर्याप्त सार्वजनिक नियंत्रण ने इस विफलता को जन्म दिया।

केन्याई सरकार ने प्रारम्भिक अनुरोधों पर “तुरंत तकनीकी समीक्षा” की घोषणा की, परन्तु वास्तविक सुधार के संकेत अभी धुंधले हैं। इस बीच, विपक्षी दल और नागरिक समाज समूह इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि ऐसी डिजिटल स्वास्थ्य नीति का प्रयोग तब तक नहीं होना चाहिए जब तक उसकी लागत‑भेदभावपूर्ण प्रभावों की स्वतंत्र जांच न हो।

भारत में समान डिजिटल‑स्वास्थ्य पहलें, जैसे वह प्रक्रिया‑आधारित अस्पताल प्रबंधन प्रणाली और AI‑सहायता प्राप्त बीमा मूल्य निर्धारण, इस केन्याई अनुभव से सबक ले सकते हैं। देश में स्वास्थ्य‑सेवा का डिजिटलकरण तेज़ी से हो रहा है, परन्तु डेटा‑गवर्नेंस, सामाजिक‑आर्थिक असमानता, और प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दे अभी भी अधूरा रूप रखते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लागू करने से पहले व्यापक सामाजिक‑आर्थिक परीक्षण, सामुदायिक सहभागिता, तथा स्पष्ट पुनरावृत्ति‑मानदंड स्थापित करना आवश्यक है—नही तो “स्मार्ट” शब्द के पीछे सच्ची “समानता” छिपी रह जाएगी।

इस घटना ने यह सवाल उठाया है कि तकनीकी नवाचार को सामाजिक न्याय के साथ कैसे संतुलित किया जाए। यदि नीतियों के निर्माता निचले आय वर्ग के वास्तविक जरूरतों को परखा नहीं रहे, तो डिजिटल समाधान खुद को “भुगतान‑सक्षमता” के नए रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं, जो अंततः मौजूदा असमानताओं को गहरा ही दे देगा।

Published: May 4, 2026