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Category: समाज

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ऐतिहासिक विश्वविद्यालय परिसरों की पतन: सुंदरता के पीछे सूखती बुनियादी सुविधाएं

दुनिया के दस सबसे सुंदर विश्वविद्यालय परिसरों की लिस्ट, जिसमें आयरलैंड की धुंध से घिरी रोबर्स कॉलेज, यूके की गोथिक क्वीनस कॉलेज, और अमेरिकी आयव लीग की महोगनी‑सिंगार वाली इमारतें शामिल हैं, अक्सर सोशल मीडिया पर हाइपरलिंक की तरह फैलती है। लोग इन पत्थर‑की‑दीवारों को ‘समय‑यात्रा’ कह कर प्रशंसा करते हैं, पर वही दीवारें कई बार छात्रों की रोज़मर्रा की जरूरतों से धूमिल रह जाती हैं।

इन विश्व‑प्रसिद्ध परिसरों में आधुनिक बुनियादी सुविधाओं की कमी अब एक सामाजिक समस्या बन चुकी है। कई कैंपस में पुरानी पाइपलाइन से पानी रिसना, खराब विद्युत व्यवस्थान, और असंगत इंटरनेट कनेक्शन आम बात हैं—ऐसी स्थितियों में ‘नोबेल सपने’ लिखना संभव नहीं। प्रशासनिक रिपोर्टों में कहा गया है कि वार्षिक बजट में विरासत संरक्षण के लिये अल्प प्रतिशत ही आवंटित किया जाता है, जबकि नई सौंदर्य‑पर्यटन परियोजनाओं को प्राथमिकता मिलती है। यह असमानता न केवल छात्रों की पढ़ाई‑में‑लगने की क्षमता को कमजोर करती है, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों के सार्वजनिक स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं की उपेक्षा का भी संकेत देती है।

भारत में भी कई प्राचीन शैक्षिक संस्थान—जैसे वाराणसी के बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की ओरिएंटेड गॉथिक महल—ऐसे ही समस्याओं का सामना कर रहे हैं। जबकि नई तकनीकी संस्थानों की इमारतें हर साल उन्नत मानक के साथ बनती हैं, इन विरासत शैलियों को ‘संरक्षण’ का लेबल दे कर निधि कटौती का सामना करना पड़ता है। प्रशासन की यह दोहरी नीति, जहाँ ‘इतिहास को संजोना’ कह कर कागज पर प्रतिबद्धता दर्ज है, पर व्यावहारिक कार्यान्वयन में असफलता दिखती है, एक ठंडी हँसी को उत्पन्न करती है।

संक्षेप में, यह कहा जा सकता है कि विश्व‑प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों के वैभवशाली पत्थर खुद ही इतिहास के गवाह हैं, पर उनके भीतर की सुविधाएँ 21वीं सदी की कसौटी पर खरे नहीं उतर पातीं। यदि इन प्रतिष्ठानों को केवल पर्यटन के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि सार्वजनिक शैक्षिक इकाइयों के रूप में पुनः मूल्यांकन किया जाए, तो नीति‑निर्माताओं को न केवल विरासत संरक्षक के रूप में, बल्कि छात्र‑केन्द्रित प्रबंधन के रूप में भी जवाबदेह बनाया जा सकता है। यह सामाजिक न्याय का सवाल है—भव्यता के पीछे छिपे हुए असमानता को पहचानना, और इसे सुधारने के लिये ठोस, पारदर्शी और समय पर वित्तीय कदम उठाना।

Published: May 9, 2026