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Category: समाज

एमडीयू की नीहा सिवाच ने NDA में महिला सर्वश्रेष्ठ में 14वाँ भारतीय रैंक प्राप्त किया

जुह्जर जिले के एक छोटे किसान परिवार से निकलकर महार्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) की 18‑वर्षीय एनसीसी कैडेट नीहा सिवाच ने नेशनल डिफेंस अकादमी (NDA) 2025 परीक्षा में महिलाओं में 14वाँ ऑल‑इंडिया रैंक हासिल किया। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण और महिला छात्रों के लिए शैक्षिक एवं सामाजिक असमानताओं के मौजूदा खाके को चुनौती देती है।

नीहा ने बी.एससी. गणित की पढ़ाई के साथ-साथ स्वयं‑अध्ययन और विश्वविद्यालय के द्वारा उपलब्ध कराए गये एसएसबी (सर्विस चयन बोर्ड) कोचिंग का सहारा लिया। जहाँ शहरी महाविद्यालयों में परिष्कृत करियर काउंसलिंग और फिजिकल फिटनेस सुविधाएँ सामान्य हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी बुनियादी सुविधाओं की कमी अक्सर सपना बनकर रह जाती है। इस पर विश्वविद्यालय की प्रतिक्रिया “समान अवसर प्रदान करने” की प्रशंसा से अधिक नहीं, बल्कि नियामक संस्थाओं को इस बात का भी स्मरण कराती है कि रजिस्ट्री में नाम लिखने से पहले कई बार प्री‑टेस्ट ट्रेनों की व्यवस्था भी नहीं होती।

रक्षा सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी अब बढ़ रही है, पर उनका प्रतिशत अभी भी कुल भर्ती का कम डेटा अंक है। नीहा की सफलता इस बात का संकेत देती है कि यदि सही मार्गदर्शन, आर्थिक सहायता और सुदृढ़ प्रशिक्षण ढांचा हो, तो ग्रामीण लड़कियों की संभावनाएँ शहरी प्रतिस्पर्धा से पीछे नहीं रह सकतीं। यहाँ निहित प्रश्न यह है कि नीति‑निर्माताओं ने “महिला सशक्तिकरण” के अधिनियम पर हस्ताक्षर तो किए हैं, पर वास्तविक कार्यान्वयन में किस हद तक सतत फंडिंग और निगरानी व्यवस्था स्थापित की गई है।

उदाहरण के तौर पर, सरकार ने 2023 में ‘रूरल स्कॉलरशिप स्कीम’ को दोबारा शुरू किया था, पर रिपोर्टों में कहा गया है कि ग्रामीण छात्राओं को अक्सर सम्पूर्ण दस्तावेज़ीकरण की जटिलता में फँसना पड़ता है। नीहा की कहानी यह स्पष्ट करती है कि व्यक्तिगत दृढ़निश्चय के साथ-साथ “पाँच‑सतारा” संस्थागत सहयोग की आवश्यकता है, न कि केवल “तीन‑स्टार” प्रशंसा‑पत्रों की।

एमडीयू के प्रशासन ने इस जीत को “वैश्विक मानकों पर हमारी शैक्षणिक गुणवत्ता का प्रमाण” कहा, लेकिन अभिप्रेत प्रभाव को तभी वास्तविकता में बदला जा सकता है जब संशोधित शैक्षिक नीति, ग्रामीण छात्रावास, और सुसज्जित शारीरिक प्रशिक्षण केंद्रों को प्राथमिकता दी जाये। नीहा की प्रतीक्षा अब केवल खड़कवसला में प्रशिक्षण के लिए नहीं, बल्कि एक ऐसे मॉडल के लिए है, जहाँ हर ग्रामीण महिला को देश की सेवा में योगदान देने का समान मौका मिले।

Published: May 4, 2026