‘एक जीवन को आसान बनाना’ के नाम पर एक‑ही‑परियोजना: आशा की झलक और प्रशासनिक अनुत्तरदायित्व
लखनऊ नगर निगम ने हाल ही में "एक जीवन" योजना की घोषणा की, जिसमें प्रत्येक वार्ड से केवल एक वरिष्ठ नागरिक को मुफ्त में चलने‑चलेने की सहायक उपकरण (वोकर, स्टेशनरी, मेडिकल किट) प्रदान करने का वादा किया गया। योजना के उद्घाटन में अधिकारी ने अमेरिकी दार्शनिक राल्फ वाल्डो एमर्सन के इस उद्धरण को उद्धृत किया – “सफ़लता यह जानना है कि आपने कम से कम एक जीवन को आसान बना दिया है।”
सरकारी दस्तावेज़ों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य अत्यधिक बुजुर्गों और दिव्यांगों के जीवन स्तर को सुधारना था, ताकि उन्हें रोजमर्रा की कठिनाइयों से नजदीकी मदद मिल सके। लक्ष्य था 2026‑27 वित्तीय वर्ष में 90 वार्डों में 90 लाभार्थियों को उपकरण प्रदान करना।
पर्यवेक्षक निकाय की रिपोर्ट दर्शाती है कि अब तक केवल 27 उपकरण वितरित हो पाए हैं, जबकि 90 मानदंड पूरे हुए थे। कई वार्डों में चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी, दस्तावेज़ीकरण में गलतियाँ और प्राथमिकता सूची का छिपा‑छिपा कर बनाना प्रमुख कारण बताये गये। असल में, अधिकांश योग्य वरिष्ठ नागरिकों को न सूचना मिली, न ही आवेदन करने का कोई मंच मिला।
जिला सामाजिक कल्याण विभाग के अधीनस्थ अधिकारी इस बात को “प्राथमिक चरण की परीक्षणात्मक पहल” कहते हैं, लेकिन प्रतीत होता है कि परीक्षण में केवल “एक ही जीवन” को बदलने की आशा के पीछे, व्यापक सामाजिक असमानता को नजरअंदाज किया गया। इस तरह की ‘टोकन’ परियोजनाएँ अक्सर तब तक ही सफल मानी जाती हैं जब तक उन्हें मीडिया की सराहना मिलती रहे।
सिविल समाज के प्रतिनिधियों ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा, “एक वार्ड में एक बुजुर्ग की मदद करने से पूरे शहर की बुजुर्ग जनसंख्या का समाधान नहीं हो सकता। नीति‑क्रियान्वयन में अत्याधिक चयनात्मकता ही अब तक के बड़े सामाजिक खर्चों की प्रमुख विफलता रही है।” उन्होंने तुरंत एक व्यापक, समावेशी और सतत सहायता मॉडल की मांग की, जिसमें न केवल उपकरण, बल्कि आयुर्वेदिक देखभाल, घर पर नर्सिंग और आश्रितों के लिए पेंशन‑जैसी नियमित आय सुनिश्चित की जाए।
इस पहल की आलोचना के बीच, नगर निगम ने अगली महीनों में “डेटा‑ड्रिवन चयन प्रक्रिया” लागू करने और स्वतंत्र निगरानी समिति स्थापित करने का वादा किया है – एक वाक्यांश जो शायद केवल प्रशासनिक कागज़ात को ही अपडेट करेगा, न कि वास्तविक जीवन को। इस तरह की योजनाओं में सफलता का माप केवल उद्धरण‑पुस्तकों में नहीं, बल्कि सतत, मापक और सभी वर्गों के लिए सुलभ लाभ में होना चाहिए।
Published: May 3, 2026