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इरान संघर्ष के बाद 'ऑपरेशन एपीक फ़्यूरी' समाप्त, भारत में संसाधन खपत पर सवाल उठे
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा चलाए जा रहे "प्रोजेक्ट फ्रीडम" में अस्थायी विराम की घोषणा के साथ, मध्य‑पूर्व में चल रहे इरान‑विरोधी युद्ध की समाप्ति का संकेत मिला है। इस विकास को विदेश नीति विशेषज्ञों ने "युद्ध की समाप्ति की ओर पहला कदम" कहा, परन्तु भारत में इस विदेशी संघर्ष के बहिर्गामी प्रभावों पर चर्चा अभी बाकी है।
वित्तीय वर्ष 2025‑26 में भारत सरकार ने अपनी वार्षिक बजट में रक्षा तथा वैकल्पिक रणनीतिक प्रतिरक्षा के लिये लगभग २.७ ट्रिलियन रुपये आवंटित किए थे। आलोचनात्मक रूप से देखा जाए तो इस बड़े पैमाने के खर्च को सामाजिक क्षेत्रों, विशेषकर स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी नागरिक सुविधाओं से हटाते हुए, कई राज्य‑स्तर के विकास योजनाओं में देरी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे जल‑संकट, शहरी स्लमों में बढ़ती कचरा‑प्रबंधन समस्या और स्कूली बच्चों के लिए अपर्याप्त बुनियादी ढांचा इस बात के संकेत हैं कि युद्ध‑आधारित खर्चों का भार आम नागरिकों की जिंदगी पर प्रत्यक्ष रूप से महसूस हो रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के नवीनीकरण हेतु आवंटित धन में १८ % की गिरावट आई है। परिणामस्वरूप कई रोगी को नजदीकी शहर तक यात्रा करनी पड़ती है, जिससे श्रम‑उत्पादकता और परिवारिक आय पर असर पड़ता है। इसी तरह शिक्षा विभाग ने कहा कि प्रतिभावान छात्रों के लिये स्कॉलरशिप और बुनियादी विद्यालय निर्माण में देरी का मुख्य कारण "अधिकतम बजट व्यय को रणनीतिक रक्षा में पुन:आवंटित" करना रहा।
नागरिक समाज के प्रतिनिधि इस बात को लेकर चेतावनी दे रहे हैं कि "बजट में जब रक्षा को प्राथमिकता दी जाती है, तो सार्वजनिक स्वास्थ्य और शिक्षा की सहनशीलता सीमित हो जाती है"। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि विदेशी युद्ध की समाप्ति के बाद शेषित संसाधनों को पुनः सामाजिक क्षेत्रों में लौटाया जाए, जिससे स्वास्थ्य‑सुविधाओं का विस्तार, स्कूल‑इन्फ्रास्ट्रक्चर का उन्नयन और स्वच्छता‑सेवाओं का सुदृढ़ीकरण संभव हो सके।
दूसरी ओर, विदेश मंत्रालय ने कहा कि इरान पर युद्ध का समाप्त होना एशिया‑प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता लाएगा और इससे भारत को ऊर्जा सुरक्षा में दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है। लेकिन नीति‑निर्माताओं को यह साबित करना होगा कि इस सुरक्षा‑संकल्पना को साधारण भारतीय नागरिकों की जीवन‑स्तर सुधार में कैसे बदला जाएगा।
संक्षेप में, "ऑपरेशन एपीक फ़्यूरी" की समाप्ति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सकारात्मक संकेत है, परन्तु इसका वास्तविक लाभ भारत में तभी महसूस किया जाएगा जब प्रशासनिक प्रबंधन में इन युद्ध‑सम्बन्धित खर्चों को सामाजिक प्राथमिकताओं के लिये पुनःसमायोजित किया जाएगा। वर्तमान में, नागरिक सुविधाओं की गिरती गुणवत्ता और सामाजिक असमानता की बढ़ती दहलीज इस बात की याद दिलाती है कि विदेश नीति का प्रभाव केवल विदेश ही नहीं, बल्कि प्रतिदिन के भारत के घर-परिवार तक विस्तारित है।
Published: May 6, 2026