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Category: समाज

इंटर मिलान की खिताबी जीत ने उजागर किया भारत में फुटबॉल बुनियादी ढाँचा का अभाव

इंटर मिलान ने 2-0 से पार्मा को हराकर 2025-26 इटली की सीरी ए श्रृंखला में अपना 21वाँ स्कुडेट्टो जोड़ा। यह उपलब्धि यूरोपीय क्लबों की दीर्घकालिक योजना, उत्कृष्ट प्रशिक्षण सुविधाओं और सतत वित्तीय समर्थन का नतीजा है। उसी समय भारत में फुटबॉल के प्रति सार्वजनिक नीति, प्रशासनिक फोकस और नागरिक सुविधा के स्तर पर गहरा अंतर दिखता रहता है।

देश में फुटबॉल के विकास को लेकर कई सरकुलेटेड योजनाएँ मौजूद हैं—इंडियन सुपर लीग (आईएसएल), राष्ट्रीय फुटबॉल अकादमी, तथा कुछ राज्यों के लिए खेल‑विकास निधि। परंतु इन पहलों का प्रयोग अक्सर टेढ़ी-मेढ़ी प्रशासनिक प्रक्रिया, असमान फंड वितरण और बुनियादी ढाँचा‑अभेद्यता के कारण सीमित रहता है। कई छोटे शहरों में ग्रासरूट स्तर की सॉकर स्कूलों के पास पर्याप्त मैदान, जल निकासी या सुरक्षित प्रकाश व्यवस्था का अभाव है, जबकि यूरोप में क्लबों को प्रत्येक वर्ष सैकड़ों करोड़ रुपये व्यय करने की अनुमति है।

स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से देखिए तो खेल सुविधाओं की कमी सीधे शारीरिक सक्रियता के अवसर को घटाती है, जिससे मोटापा, हृदय रोग और अन्य गैर‑संचारी रोगों के जोखिम में वृद्धि होती है। शिक्षा विभाग द्वारा शारीरिक शिक्षा को पाठ्यक्रम में केवल एक अनुच्छेद के रूप में शामिल किया जाना, इस बात का स्पष्ट संकेत है कि नीति‑निर्माता दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ से अधिक त्वरित दिखावे को प्राथमिकता देते हैं।

उपभोक्ता एवं नागरिक अधिकार समूहों ने बार‑बार सुझाव दिया है कि सरकार को राष्ट्रीय खेल योजना में स्पष्ट लक्ष्य‑निर्धारण, प्रशासकीय पारदर्शिता और जमीनी स्तर पर निगरानी प्रणाली स्थापित करनी चाहिए। परन्तु कई बार जारी योजनाओं का ‘कागज पर’ मूल्यांकन ही किया जाता है, जबकि असल में फंड का निकास या परियोजना पूर्णता नहीं हो पाती। इस अचलता का व्यंग्य इस तथ्य में है कि जब इंटर मिलान जैसे क्लब विश्व मंच पर शिखर पर होते हैं, तो भारत में “खेल‑आधारभूत संरचना” शब्द दुर्लभ रूप से समाचार‑शीर्षक बन पाता है।

तीन प्रतियोगिताओं के शेष होने के बाद भी इंटर मिलान ने अपने प्रतिस्पर्धी को पीछे छोड़ दिया, जबकि भारत में असमानता से ग्रस्त शौकिया सॉकरर्स को अक्सर बुनियादी उपकरण की कमी और अनियमित प्रतियोगिताओं का सामना करना पड़ता है। यह सामाजिक विषमता केवल खेल तक सीमित नहीं, बल्कि रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के व्यापक क्षेत्र में प्रतिध्वनित होती है।

समापन में कहा जा सकता है कि इंटर मिलान की जीत यूरोपीय फुटबॉल के समेकित विकास का प्रमाण है, जबकि भारत में मौजूदा नीति‑रूपरेखा का पुनर्मूल्यांकन अनिवार्य हो गया है। प्रशासनिक निष्क्रियता को तोड़ना, फंड प्रवाह को सुदृढ़ करना और स्थानीय स्तर पर सुविधाओं का वास्तविक कार्यान्वयन ही वह ‘विजेता’ बना सकता है जिसकी भारतीय जनता सच्चे अर्थों में प्रतीक्षा कर रही है।

Published: May 4, 2026