आईआईटी रोपड़ में पीएचडी छात्रा के यौन उत्पीड़न आरोपों पर प्रोफ़ेसर को मजबूरियों की छुट्टी, पर्यवेक्षक बदला गया
आईआईटी रोपड़ के एक पीएचडी छात्रा ने अपने मार्गदर्शक के खिलाफ शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न, जबरन हस्तक्षेप और धमकी के गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोपों में निरन्तर शैक्षणिक दबाव, निजी जीवन में अनुचित दखल और शारीरिक उत्पीड़न शामिल हैं, जिससे छात्रा के शोध कार्य में बाधा उत्पन्न हुई। यह मामला भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों, विशेषकर महिला छात्रों के सुरक्षा और कल्याण के प्रश्न को उजागर करता है।
विकल्प के तौर पर, संस्थान ने आरोप मिलने के 24 घंटे के भीतर एक अंतर्राष्ट्रीय शिकायत समिति (ICC) का गठन किया, आरोपी प्रोफ़ेसर को ‘बढ़ी हुई मजबूरियों की छुट्टी’ पर रखा तथा छात्रा के पर्यवेक्षक को बदल दिया। साथ ही स्थानीय पुलिस को मामला सौंपा गया और एक जाँच चल रही है। आधिकारिक तौर पर संस्थान ने छात्र सुरक्षा को प्राथमिकता दी होने का बयान जारी किया, परन्तु ऐसा प्रतीत होता है कि पहले की नौकरशाही के घुमावदार मार्ग ने कार्यवाही को देर तक टाला।
शिक्षा क्षेत्र में शक्ति असंतुलन, विशेषकर वरिष्ठ‑जुनी प्राध्यापकों और युवा शोधकर्ताओं के बीच, अक्सर महिला छात्रों को असुरक्षित बना देता है। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि नीतियों के कागज़ी रूप में होने के बावजूद, उनके व्यावहारिक कार्यान्वयन में पत्थर की तरह कठोरता नहीं, बल्कि अक्सर ढीलापन ही रहता है। प्रशासनिक तत्परता की प्रशंसा तो की जा सकती है, पर 24‑घंटे का जलद‑प्रतिक्रिया कई बार पहले की देरबाजियों की सच्ची क्षतिपूर्ति नहीं हो पाती।
सार्वजनिक प्रतिक्रिया ने इस मामले को सामाजिक असमानता और संस्थागत उत्तरदायित्व के मुद्दे के रूप में देखा है। यदि शिक्षा संस्थान, जो ज्ञान और नवाचार के केंद्र हैं, अपनी ही चार दीवारों के भीतर सुरक्षा का भरोसा नहीं दे पाते, तो छात्र और शोधकर्ता अपने अधिकारों के लिए वैकल्पिक मंचों की ओर रुख करेंगे—जिससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति की कार्यक्षमता पर प्रश्न उठते हैं।
आगे की जाँच के परिणाम और संस्थान की दीर्घकालिक सुधारात्मक कदम यह तय करेंगे कि यह घटना केवल एक व्यक्तिगत त्रुटि है या प्रणालीगत कमजोरी का संकेत। यदि सही ढंग से निपटा गया, तो यह छात्र सुरक्षा के लिए एक नया मानक स्थापित कर सकता है; अन्यथा, यह शैक्षणिक वातावरण में भरोसे के जाल को और गहरा कर देगा।
Published: May 4, 2026