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Category: समाज

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आईआईएम कोझिकोडे की बीएमएस एटी 2026 प्रवेशपत्र जारी, डिजिटलीकरण में नई चुनौतियां

इण्डियन इन्स्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) कोझिकोडे ने अपने बैचलर मैनजमेंट प्रोग्राम (बीएमएस) की अभिरुचि परीक्षण (एटी) 2026 का प्रवेशपत्र सार्वजनिक कर दिया है। आधिकारिक पोर्टल iimk.ac.in के माध्यम से लॉग‑इन करके उम्मीदवार अपने हॉल टिकट डाउनलोड कर सकते हैं, और परीक्षा 19 मई को निर्धारित है।

प्रवेश प्रक्रिया में शैक्षणिक मूल्यांकन, एटी, व्यक्तिगत साक्षात्कार एवं अंतिम मेरिट सूची का क्रम है। इस पारदर्शी क्रम के पीछे एक बात खास तौर पर उजागर होती है – शीर्षस्थ प्रबंधन शिक्षा संस्थानों की डिजिटल प्रणालियों पर निर्भरता, जो सामाजिक असमानता की नई परतें जोड़ती है।

डिजिटल प्रवेशपत्र जारी करने के बरसात के इस कदम में तकनीकी प्रवेश को आसान बनाने का दावा है, पर वास्तविकता में कई सामाजिक वर्गों के लिए ‘लगिन‑क्रेडेंशियल’ की आवश्यकताएँ बड़ी बाधा बन सकती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित इंटरनेट बैंडविड्थ, मध्यम वर्ग के छात्र जो उच्च‑स्तरीय लैपटॉप या स्मार्टफ़ोन नहीं रख पाते, और उन लोगों के लिए जहाँ सरकारी पेंशन या छात्रवृत्ति साक्षरता का समर्थन नहीं करती, ऐसे सब को यह डिजिटल मंच समान अवसर प्रदान करता है या नहीं, यह प्रश्नात्मक बना रहता है।

प्रशासन ने वेबसाइट से संबंधित तकनीकी मदद के लिये एक हेल्पलाइन और ई‑मेल संपर्क स्थापित किया है, पर यह भी देखा गया है कि इस तरह की सहायता अक्सर समय के साथ ही जवाब देती है, जिससे परीक्षा की तैयारी में तनाव बढ़ जाता है। एक ओर जहाँ संस्थान ‘मेरिट‑आधारित चयन’ का उल्लेख करता है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक एवं आर्थिक पृष्ठभूमि का दबदबा स्पष्ट हो जाता है।

ऐसे में यह कहना उचित है कि आईआईएम कोझिकोडे ने डिजिटल प्रगति का जश्न मनाते हुए एक आधुनिक ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया, पर यह भी सवाल बना रहता है कि “ऑनलाइन” शब्द का अर्थ क्या है, जब असमान इंटरनेट पहुंच ही कई योग्य अभ्यर्थियों को अपने ही सपनों से दूर कर देती है। इस पहल ने न केवल मालूमात की पहुँच को परखा, बल्कि यह भी उजागर किया कि सार्वजनिक जिम्मेदारी और नीति‑कार्यान्वयन में कौन‑सी खामियां हैं, जो सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को कमजोर करती हैं।

इन चुनौतियों के बीच, यह आशा की जा रही है कि आगे के चरण—इंटरव्यू एवं मेरिट सूची—में संस्थान सामाजिक समावेशन को वास्तविक प्राथमिकता दे। तभी बीएमएस का लक्ष्य सिर्फ अभिरुचि परीक्षण नहीं, बल्कि एक ऐसा प्रबंधन शिक्षा मंच बन पाएगा जहाँ अवसर का वितरण समान हो, न कि डिजिटल बारिकियों से निर्धारित।

Published: May 6, 2026