अवैध 'फ्री पार्टी' में 40,000 रैवर्स ने सेना के रेंज को घेर लिया, प्रशासन की लापरवाही पर सवाल
उत्तर प्रदेश के एक छोटे शहर के पास स्थित सैन्य फायरिंग रेंज में पिछले रविवार को अनुमानित 40,000 लोग इकट्ठा होकर एक अवैध 'फ्री पार्टी' आयोजित कर रहे थे। इस आयोजन के लिए न तो कोई अनुमति मिली, न ही सुरक्षा व्यवस्था की कोई योजना तैयार की गई। युवाओं के दर्शकों ने बड़ी आवाज़ में इलेक्ट्रॉनिक संगीत पर धूम मचाते हुए, रेंज के सैटेलाइट टावर और कंट्रोल पोस्ट को भी गहरी ध्वनि‑प्रदूषण से भर दिया।
इसी बीच, स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इतनी भीड़ में चिकित्सा सहायता सीमित रह गई। कई लोगों को हटाने के लिए तुरंत एम्बुलेंस नहीं मिल पाई, जिससे छोटे रोगियों और शराब‑नशे में धुत लोगों की स्थिति बिगड़ गई। सामाजिक कार्यकर्ता उजागर करते हैं कि ऐसे आयोजन अक्सर नशीले पदार्थों के सेवन के साथ जुड़े होते हैं, परंतु पुलिस ने धूमिल सफाई की बजाय बाद में एम्बेडेड आपराधिक रिपोर्ट ही दर्ज की।
रेंज का प्रशासन, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से अत्यंत संवेदनशील स्थल है, ने यह सुन्न कर देने वाला तथ्य स्वीकार किया कि सुरक्षा कवरेज में ‘छूट’ हो गई। जब पूछताछ की गई, तो आधिकारिक बयान में कहा गया कि “इवेंट की अनधिकारता का पता नहीं चल पाया, इसलिए तुरंत कार्यवाही नहीं की जा सकी।” यह बयान उन कई वर्षों के प्रशासनिक अज्ञानता को दर्शाता है, जब तक कि भीड़ का द्रव्यमान सुगंधित न हो जाए।
स्थानीय नगरपालिका के विकास योजना में सार्वजनिक मनोरंजन सुविधाओं की कमी को उजागर किया गया था, परन्तु उपायों की ज़मीन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस घटना ने यह सवाल खड़ा किया कि किफायती और सुरक्षित सामाजिक स्थानों की अनुपलब्धता के कारण युवा वर्ग किस हद तक ‘अवैध’ निकायों पर निर्भर हो रहा है।
कुल मिलाकर, यह घटना न केवल सार्वजनिक सुरक्षा की चादरों में छेड़छाड़ का प्रमाण है, बल्कि नीति‑क्रियान्वयन में मौन बंधन को भी प्रकट करती है। जब प्रशासन खुद ही असंगठित रहने को चुनता है, तो जनता को ‘स्वयं की सुरक्षा’ का चाकू उठाकर कार्य करना पड़ता है—और यही वह बिंदु है जहाँ पहुँचती है गहरी व्यंग्यात्मक हकीकत: व्यवस्था ने अपना काम नहीं किया, इसलिए नागरिकों ने अपना ‘मनोरंजन’ खुद बना लिया।
Published: May 4, 2026