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Category: समाज

अवैध ड्रग का लक्ष्य: अमेरिकी नौसेना ने समुद्री हमला दिखाया, भारत की नीति पर सवाल उठे

अमेरिकी सैन्य विभाग ने हाल ही में एक वीडियो प्रकाशित किया, जिसमें एक संदेहास्पद ड्रग बोट पर किए गए हवाई हमले के दृश्यों को दिखाया गया है। यह फुटेज न केवल अंतर्राष्ट्रीय तस्करी के पैमाने को उजागर करता है, बल्कि भारत के तटीय राज्य भी इस खतरे से अछूते नहीं हैं।

समुद्री तस्करी का सीधा असर सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ता है: धूम्रपान, शराब एवं नशीली दवाओं के सेवन से जुड़े रोग, विशेषकर युवाओं में बढ़ते हैं। जब ऐसी गतिविधियाँ खुले समुद्र में होती हैं, तो नजदीकी पोर्ट अथवा मछली बाजारों में अनजाने में कलेक्ट किए गए पदार्थ स्थानीय जनसंख्या तक पहुंच सकते हैं। इस संदर्भ में सरकार की निगरानी तंत्र की गंभीर कमी स्पष्ट है।

वहीं, शिक्षा और जागरूकता पक्ष को देखी गई लापरवाही भी सवाल खड़ी करती है। कई तटीय स्कूलों में ड्रग-रहित माहौल बनाने के लिए कोई विशेष कार्यक्रम नहीं चल रहा; जबकि समुद्र में इसी तरह के हमलों के वीडियो आम होते नहीं, तो हमारे स्थानीय प्रशासन के पास क्यों नहीं कैमरा या ड्रोन्स हैं?

प्रशासनिक प्रतिक्रिया के चलते ही अक्सर नीति‑क्रियान्वयन में जड़ता दिखती है। विदेशी सैन्य ऑपरेशन की बारीकी से रिकॉर्डिंग किसी भी भारतीय एजेंसी द्वारा उपलब्ध नहीं कराई गई, जबकि समान मामले में जनता का सवाल उठता है कि कब तक ऐसी जानकारी को बेनकाब किया जाएगा। यह वही इतिहास दोहराता है, जब बड़े‑बड़े सुरक्षा ख़तरे सामने आते हैं, पर आम नागरिक को केवल आधे‑आधे आंकड़े मिलते हैं।

व्यंग्य यही है कि विदेश में जब ऐसे वीडियो बना‑बेढ़ कर जारी होते हैं, तो भारत में समुद्री पुलिस के पास देर से कैमरा ही रहता है। यही अनुशासनहीनता नीतियों को ‘कागज़ी’ बनाकर रख देती है, जबकि जमीन‑दर‑जमीन मुद्दे लगातार बढ़ रहे हैं।

समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए न केवल तकनीकी निवेश बल्कि स्वास्थ्य‑शिक्षा‑जागरूकता के संपूर्ण तले पर एकीकृत रणनीति की आवश्यकता है। तब ही तस्करी‑संबंधी नशीले पदार्थों का ‘ड्रॉप‑ऑफ़’ रोका जा सकता है और सार्वजनिक हित की रक्षा संभव होगी।

Published: May 6, 2026