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Category: समाज

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने निरोधित गर्भपात दवा की डाक‑पर उपलब्धता को अस्थायी रूप से फिर से जारी किया

संयुक्त राज्य के सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायाधीश सैम्युअल एलिटो के आदेश से उन सीमाओं को रोक दिया जो पाँचवें सर्किट ने मिफ़ेप्रेस्टरॉन – गर्भपात के लिये प्रयोग होने वाली प्रमुख दवा – को डाक द्वारा उपलब्ध कराने पर लगाए थे। इस निर्णय के बाद, देश भर में लगभग दो‑तीहाई गर्भपात प्रक्रियाएँ इस दवा के बिना संभव नहीं थीं, और अस्थायी रूप से उस विधि को फिर से काम में लाया गया।

भारत में भी समान दवा की उपलब्धता पर जटिल कानूनी ताने‑बाने और प्रशासनिक अड़चनें बरकरार हैं। यद्यपि 2021 में मिफ़ेप्रेस्टरॉन को राष्ट्रीय सूची में शामिल किया गया, फिर भी कई राज्यों में इसे केवल अस्पताल के डॉक्टरों को ही प्रिस्क्राइब करने की अनुमति है, जिससे ग्रामीण व गरीब वर्ग के महिलाओं को हजारों किलोमीटर यात्रा करनी पड़ती है। इस नियमन‑पर‑नियमन की प्रक्रिया ने स्वास्थ्य‑सुविधा के समान वितरण को टाल दिया है, जबकि विज्ञान‑आधारित नीति में इसका कोई ठोस कारण नहीं दिखता।

अमेरिकी कोर्ट की कार्रवाई दो मुख्य पहलुओं को उजागर करती है: पहला, अत्यावश्यक दवाओं की आपूर्ति में न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता, और दूसरा, नीति‑निर्माण में वैधता‑पर‑आधारित लचीलापन की कमी। भारत में ऐसा लचीलापन अक्सर ‘प्रोटोकॉल‑पहले’ के बैनर तले छिपा रहता है, जहाँ प्रभावी नियामक ढाँचा की अनुपस्थिति में प्रशासनिक अति‑विचार या अति‑न्यूनता दोनों दिखते हैं।

सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से देखिए तो इस दवा की डाक‑डिलीवरी का अभाव महिलाओं के आर्थिक आत्मनिर्भरता पर प्रत्यक्ष असर डालता है। गरीबी‑आधारित असमानता के कारण कई महिलाएँ अनैतिक और असुरक्षित तरीकों की ओर मुड़ती हैं, जबकि सरकारी संस्थाएँ ‘सुरक्षित गर्भपात’ के नाम पर केवल कागजी कार्रवाई में मशगूल रहती हैं। यह स्थिति एक सूखे व्यंग्य के साथ बताती है कि नीतियों में ‘सुरक्षित’ शब्द का प्रयोग किया तो है, पर उसकी सुरक्षा की रचना कहाँ है।

निर्णय का भारतीय संदर्भ में अर्थ यह भी है कि विधायी और नियामक दोनों स्तरों पर एक स्पष्ट, साक्ष्य‑आधारित ढांचा तैयार करना आवश्यक है, जिससे दवा की उपलब्धता को भौगोलिक या सामाजिक सीमा में बाँटा न जाये। जब तक स्वास्थ्य‑नीति में वास्तविक कार्यान्वयन की जाँच‑परिचय नहीं होगी, तब तक ऐसे न्यायालयीय हस्तक्षेप केवल अस्थायी राहत प्रदान करेंगे, सतह पर बदलते दिखेंगे, पर मूल समस्यायुक्त बुनियादी ढाँचा अद्याप अनुत्तरित रहेगा।

Published: May 5, 2026