POLYCET 2026 में 91.37% पास अंक, ऑनलाइन रैंक कार्ड से नई चुनौतियाँ
आंध्र प्रदेश में तकनीकी शिक्षा की पहली सीढ़ी, POLYCET 2026, ने इस साल 1.48 लाख से अधिक उम्मीदवारों को क्वालिफ़ाई किया, जिससे कुल पास दर 91.37% तक पहुंची। यह आँकड़ा, विशेषकर ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों के लिए, तकनीकी शिक्षा की पहुँच में एक आशा की किरण दर्शाता है।
परिणाम का विवरण दर्शाता है कि लड़कियों ने लड़कों से अधिक सफलता प्राप्त की, जिससे लिंग सशक्तिकरण का सकारात्मक संकेत मिलता है। फिर भी, इस सफलता के पीछे कई सामाजिक पहलू छिपे हैं। कई ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट सुविधा अभी भी असमान है, जबकि रैंक कार्ड केवल ऑनलाइन उपलब्ध कराए गए हैं। छात्रों को इंटरनेट कनेक्शन, प्रिंटर और कागज़ जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुँच न होने की स्थिति में, यह डिजिटल प्रावधान प्रतिबिंबित करता है कि प्रशासन तकनीकी समाधान को सामाजिक वास्तविकता के साथ कितना जोड़ पाता है।
राज्य बोर्ड ऑफ़ टेक्निकल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (SBTET) ने रैंक कार्ड को डाउनलोड करने का आदेश दिया और उसे प्रिंट करके काउंसिलिंग प्रक्रिया में प्रस्तुत करने की शर्त रखी। इस नीति का उद्देश्य प्रक्रियात्मक पारदर्शिता बनाये रखना है, परंतु वास्तविकता यह है कि कई छात्रों को प्रिंटिंग की लागत और समय‑सीमा के साथ दो दु:ख सतह पर खड़ा कर देती है। ऐसी स्थिति में, उन छात्रों को जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं, यह एक अनजाने में अतिरिक्त बाधा बन जाता है।
काउंसिलिंग प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन रजिस्टर करना भी एक डिजिटल बंधन बन चुका है। प्रशासन ने कहा है कि सभी जानकारी आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध होगी, परंतु एक ही पोर्टल पर भारी ट्रैफ़िक और तकनीकी गड़बड़ी की रिपोर्टें मिल रही हैं। जब तक सिस्टम स्थिर नहीं होता, तब तक इच्छुक छात्रों को अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। यह न केवल छात्रों के भविष्य की योजना को धूमिल करता है, बल्कि उनके परिवारों में आर्थिक और मानसिक तनाव भी बढ़ाता है।
शिक्षा नीति के हिस्से के रूप में ऐसे बड़े पैमाने के प्रवेश परीक्षाओं में प्रयुक्त तकनीकी उपायों को सामाजिक समानता के साथ संतुलित करना आवश्यक है। यदि डिजिटल माध्यम को अपनाने से छात्रों को असमानता के नए रूप मिलते हैं, तो वह नीति तोड़-फोड़ का उपकरण बन जाता है। प्रशासन को अब न केवल रैंक कार्ड की उपलब्धता में सुधार करना चाहिए, बल्कि स्थानीय स्तर पर ऑफ़लाइन सहायता, जैसे कि कॉलेजों और सरकारी कार्यालयों में प्रिंटिंग सुविधा प्रदान करने को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।
समग्र रूप से, 91.37% पास दर वास्तव में एक प्रशंसनीय उपलब्धि है, परंतु इसे स्थिर और समावेशी शिक्षा प्रणाली में बदलने के लिए नीतिगत शिल्पकारों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि तकनीकी समाधान सिर्फ अभिलेख नहीं, बल्कि सभी वर्गों के लिए सहज पहुंच वाला उपकरण बनें। तभी POLYCET का अगला चरण, काउंसिलिंग, वास्तविक अवसरों की सीढ़ी बन पाएगा, न कि केवल डिजिटल इस्पात का एक और जाल।
Published: May 5, 2026