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Category: समाज

NEET 2026 में 96.92% उपस्थिति, क्षमता व असमानता की दोहरी कहानी

आरोग्य शिक्षा के सबसे प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षा, NEET UG 2026 ने देश भर में 22.75 लाख पंजीकृत aspirants में से 22 लाख से अधिक उम्मीदवारों की उपस्थिति के साथ 96.92 प्रतिशत भागीदारी दर्ज की। परीक्षा 5,432 से अधिक केंद्रों पर, 551 शहरों और 14 विदेश स्थित स्थल पर आयोजित हुई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मेडिकल पाठ्यक्रमों की माँग राष्ट्रीय स्तर पर कितनी तीव्र है।

उच्च उपस्थिति दर के पीछे सामाजिक असमानता की परछाइयाँ छुपी हैं। ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को परदेशी संस्थानों में सीट मिलने की आशा के साथ शहर‑शहर में खर्च‑सहित यात्रा, आवास और प्री‑परीक्षण कोचिंग पर भारी बोझ उठाना पड़ता है। वहीँ अभिजात वर्ग के लिए ऑनलाइन मॉड्यूल, निजी ट्यूशन और विशेष तैयारी केंद्रों तक पहुंच आसान है, जिससे प्रतिस्पर्धा में समानता का सवाल बन जाता है।

प्रशासन ने परीक्षा को सुरक्षित करने के लिए दो लाख से अधिक कर्मियों को तैनात किया, बायोमैट्रिक सत्यापन और सीसीटीवी निगरानी को अनिवार्य कर दिया। जबकि तकनीकी उपाय परीक्षा की शुद्धता को बढ़ाते प्रतीत होते हैं, यह भी संकेत है कि प्रबंधन ने उम्मीदवारों की ईमानदारी पर भरोसा नहीं किया। “बायोमैट्रिक अनिवार्य, लेकिन कागज पर गलती नहीं होना चाहिए”— यह दोहरी मानकता प्रशासनिक चूकों की ओर सूक्ष्म व्यंग्य है।

सूचना प्रसार के खतरे को देखते हुए 65 से अधिक टेलीग्राम चैनलों को ब्लॉक किया गया। यह कदम misinformation रोकने की सही दिशा में है, पर साथ ही विचार विमर्श की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाता है। जब परीक्षा के परिणाम के बाद छात्रों को सूचनात्मक परामर्श चाहिए, तो डिजिटल मंचों को बंद करना किस हद तक सार्वजनिक हित की रक्षा करता है, यह अपने आप में एक नीति‑निर्णय की चूक लगती है।

समग्र रूप से देखें तो NEET 2026 की सफलता तकनीकी और लॉजिस्टिक पहलुओं में प्रशंसनीय है, परंतु इसकी सामाजिक कीमत अत्यधिक असमानता, छात्रों पर असहनीय दबाव और सूचना नियंत्रण में सरकारी अति‑सतर्कता में निहित है। आगे की नीति‑निर्माण प्रक्रिया में पात्रता मानदंडों के व्यापक पुनर्विचार, कमजोर वर्गों के लिए वित्तीय सहायता और सूचना स्वतंत्रता के संतुलन को प्राथमिकता देना आवश्यक होगा, ताकि एक ही परीक्षा में दोहरी कहानी—उपस्थिति का जश्न और असमानता की चेतावनी—समाप्त हो सके।

Published: May 4, 2026