‘FSSAI स्वीकृत’ लेबल का मतलब: नियमों की पूर्ति, स्वास्थ्य की गारंटी नहीं
भारत में पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर दिखाई देने वाला ‘FSSAI Approved’ चिन्ह अक्सर उपभोक्ताओं को विश्वास दिलाता है कि वह उत्पाद सुरक्षित और पोषक है। वास्तविकता में यह चिन्ह केवल यह संकेत करता है कि निर्माता ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमन‑अनुपालन के दायरे में अपना लाइसेंस प्राप्त किया है और आवश्यक लोगो व लाइसेंस नंबर का उल्लेख किया है। यह संकेतक कानूनी जिम्मेदारी को दर्शाता है, न कि किसी गुणवत्ता या स्वास्थ्य‑सुविधा की गारंटी।
समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर मध्यम‑आर्थिक वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं के लिए यह अंतर समझना आवश्यक है। इन वर्गों की खरीदारी शक्ति अक्सर सीमित होती है, जिससे वे कम कीमत वाले ब्रांडों पर अधिक निर्भर रहते हैं। जब ऐसे ब्रांड ‘FSSAI Approved’ प्रदर्शित करते हैं, तो उन्हें स्वास्थ्य‑सुरक्षा के मानदंड से जोड़ना स्वाभाविक बन जाता है, जबकि वास्तविक निरीक्षण प्रक्रिया अक्सर दस्तावेज़ी औपचारिकताओं तक सीमित रह जाती है।
प्रशासनिक दृष्टिकोण से FSSAI ने लेबलिंग के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं – लोगो का आकार, लाइसेंस नंबर की उपस्थिति, तथा ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करना। लेकिन इन नियमों की प्रभावी निगरानी में झलकती लापरवाही स्पष्ट है। कई मामलों में उत्पादकों ने आधे‑धोखे तौर‑तरीके अपनाकर लोगो को प्रमुखता दी, जबकि वास्तविक परीक्षण प्रमाणपत्र या उत्पादन प्रक्रिया का अभाव रहा। यह ‘प्रमाणपत्र‑प्रसिद्धि’ की संस्कृति न केवल उपभोक्ता भ्रम को बढ़ावा देती है, बल्कि छोटे उद्यमों को अनावश्यक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ भी प्रदान करती है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यह स्थिति खतरनाक है। ‘स्वीकृत’ शब्द का दुरुपयोग पोषण‑अल्पता, एलर्जेन‑संबंधी प्रतिक्रियाओं और दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिमों को जन्म दे सकता है। विशेषकर बच्चों, वृद्धों और रोग प्रतिरोधक क्षमता कम वाले लोगों पर इसका असर गहरा हो सकता है, क्योंकि वे अक्सर इन संकेतों पर भरोसा करके खरीदारी करते हैं।
नतीजतन, इस मुद्दे पर नीति‑निर्माताओं को दो‑तरफ़ा कार्रवाई करनी चाहिए: प्रथम, नियामक निरीक्षण को सुदृढ़ करना, जिसमें उत्पादन‑लाइन पर अनियमित रैंडम परीक्षण और लाइसेंस का वास्तविक उपयोग शामिल हो। द्वितीय, उपभोक्ताओं को ‘FSSAI Approved’ की सीमाओं के बारे में जागरूक करने हेतु व्यापक जनसंचार अभियान चलाना। अंततः, अगर प्रशासन को अपनी ही प्राथमिकताओं – लाइसेंस‑प्रदर्शन से आगे गुणवत्ता‑सुरक्षा की ओर – नहीं बदलना है, तो इस लेबल का ‘विश्वास‑चिह्न’ होने का दावा ही समाप्त हो जाएगा।
Published: May 6, 2026