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Category: समाज

CUET UG 2026 का प्रवेश पत्र जारी, छात्रों पर बढ़ता बोझ और प्रशासनिक चुनौतियां

राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने 5 मई को CUET UG 2026 के प्रवेश पत्र को आधिकारिक पोर्टल cuet.nta.nic.in पर उपलब्ध कराया। यह कदम वैधता के साथ परीक्षा प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक माना जाता है, परन्तु यह कई सामाजिक प्रश्नों को फिर से उजागर करता है।

परीक्षा 11 से 31 मई तक, तीन घंटे के शिफ्ट में आयोजित होगी। उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र में नियत समय पर पहुँचना अनिवार्य है, साथ ही उन्हें प्रिंटेड प्रवेश पत्र और मान्य फोटो पहचान पत्र ले जाना आवश्यक है। डिजिटल माध्यम से प्रवेश पत्र डाउनलोड करने की सुविधा के बावजूद, ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए इसे भौतिक रूप में उपलब्ध कराना अभी भी एक बड़ी बाधा बनता है। इस वर्ग के कई छात्रों के पास प्रिंटर या स्कैनर नहीं होते, और निकटतम साइनिंग पॉइंट तक यात्रा में अतिरिक्त लागत जुड़ती है।

इसी तरह, फोटो पहचान पत्र की आवश्यकता ने भी नई चुनौतियां पेश की हैं। कई प्रथम‑पीढ़ी के छात्र, जो अभी-अभी स्कूल से निकल रहे हैं, उनके पास कोई सरकार‑जारी पहचान या ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होता। इससे उन्हें अतिरिक्त दस्तावेज़ प्राप्त करने के लिए लंबी कतारों और महँगी प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है, जो पहले से ही शिक्षा‑सेवा में असमानता को बढ़ा रहा है।

प्रशासनिक दृष्टिकोण से यह बताया गया है कि सभी परीक्षार्थियों को समान अवसर प्रदान करने के लिए प्रवेश पत्र ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया है। लेकिन वह ही नीति डिजिटल विभाजन को नजरअंदाज करती दिखती है, जहाँ इंटरनेट की पहुँच ही नहीं, बल्कि बेसिक कंप्यूटिंग साक्षरता भी पर्याप्त नहीं है। एक समय में कई हजार छात्रों को एक ही पोर्टल पर लोड करने से सर्वर अभिरुचि और तकनीकी गड़बड़ियां भी संभावित हैं, जो परीक्षा‑परीक्षण की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिह्न लगाती हैं।

शिक्षा के इस महत्वपूर्ण मोड़ पर, छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी अनदेखी की जा रही है। प्रवेश पत्र के अचानक जारी होने के बाद, कई उम्मीदवारों ने अपनी तैयारी के साथ‑साथ लॉजिस्टिक तैयारियों को भी तेज़ी से पूरा करने का दबाव महसूस किया है। यही तनाव, विशेषकर पूर्वानुमानित सहायता न मिलने वाले वर्ग में, प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणामस्वरूप सामाजिक असमानता को और गहरा कर सकता है।

इन चुनौतियों के बीच, नीति निर्माताओं से यह अपेक्षा की जाती है कि वे सर्वसमावेशी उपायों पर ध्यान दें—जैसे कि निकटतम सरकारी कार्यालय में मुफ्त प्रिंटिंग, पहचान पत्र के लिए वैकल्पिक प्रमाणपत्र, और परीक्षा‑केन्द्रों में री‑असाइनमेंट की सुविधा। ऐसी पहलें न केवल छात्रों को समान अवसर प्रदान करेंगी, बल्कि प्रशासनिक उत्तरदायित्व को भी सुदृढ़ करेंगी।

संक्षेप में, CUET UG 2026 का प्रवेश पत्र जारी होना एक आवश्यक कदम है, परन्तु यह भारत की शिक्षा प्रणाली में निहित असमानताओं, डिजिटल विभाजन और प्रशासनिक अति‑सरलीकरण की ओर संकेत करता है। उत्तरदायी सुधार के बिना, छात्रों के लिए इस परीक्षा का बोझ केवल शैक्षिक नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रहेगा।

Published: May 6, 2026