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Category: समाज

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AI युग में लेगेसी सिस्टम को तकनीकी ऋण नहीं, सफलता की नींव कहा गूगल के माहेश कुमार गोयल ने

गूगल के सीनियर डेटा और AI एक्सपर्ट माहेश कुमार गोयल ने आज अपने वार्तालाप में कहा कि भारतीय कंपनियों और सरकारी निकायों को अपने पुराने सिस्टमों को ‘तकनीकी ऋण’ के रूप में नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सफलता की बुनियादी नींव मानना चाहिए। उनका मानना है कि नई तकनीक को शून्य से विकसित करने (ग्रीनफ़ील्ड नवाचार) की तुलना में मौजूदा डेटा और प्रक्रियाओं को AI से जोड़ना अधिक सार्थक है।

भारत में सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र दोनों में कई संस्थाएँ अभी भी लेगेसी मेनफ़्रेम, पुरानी ERP और कस्टम कोड पर निर्भर हैं। इन प्रणालियों को बदलने की इच्छा समझ में आती है, परंतु अक्सर नीति‑निर्माताओं की प्रतिबिंबित रणनीति केवल नए AI पायलटों पर केंद्रित रहती है, जबकि मौजूदा डेटा का उपयोग नहीं किया जाता। परिणामस्वरूप ‘इम्प्रेसिव डेमो’ बनते हैं, लेकिन वास्तविक कार्यशैली में सुधार नहीं होता।

गूगल के प्रतिनिधि ने बताया कि ‘MCP’ एवं ‘GraphRAG’ जैसे उपकरण AI को लेगेसी डेटा स्रोतों से जोड़ते हैं, जिससे जोखिम घटता है, संस्थागत ज्ञान संरक्षित रहता है और कर्मचारियों को पुनः‑स्किल करने का अवसर मिलता है। यदि ऐसी तकनीकें भारतीय सार्वजनिक सेवाओं में अपनाई जाएँ, तो स्वास्थ्य, शिक्षा व ग्रामीण वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में कागजी कामकाज की बौछार घटेगी और पहली बार डेटा‑आधारित निर्णय‑लेना संभव होगा।

हालाँकि, प्रशासनिक प्रतिक्रिया में अभी भी जड़ता दिखती है। कई विभाग AI प्रयोगशालाओं के लिए बजट आवंटित कर रहे हैं, परन्तु मौजूदा लेगेसी सिस्टमों का प्रलेखन, सुरक्षा मानक और इंटरफ़ेस विकास को अनदेखा किया जा रहा है। यही कारण है कि अक्सर नई पहलें ‘डेमो‑रूढ़ी’ बनकर रह जाती हैं—कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के बजाय सिस्टम को फिर से शुरू करने की कोशिश की जाती है।

न्यूनतम व्यंग्य के साथ कहा जा सकता है कि कई अधिकारी AI की चमक में ताली बजाते हैं, पर जब वास्तविक कोड चलाने की बात आती है तो ‘कनेक्शन इश्यू’ की शिकायत करते हैं। यह स्थिति न केवल सार्वजनिक धन को व्यर्थ करती है, बल्कि सामाजिक असमानता को भी गहरा करती है, क्योंकि ग्रामीण एवं निम्न‑आय वर्ग के लोग डिजिटल सेवाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि नीति‑निर्माण में अब ‘एकीकृत दृष्टिकोण’ अपनाना आवश्यक है—जहाँ लेगेसी सिस्टमों की सुरक्षा, डेटा‑गवर्नेंस और कर्मचारी पुनः‑प्रशिक्षण को AI रणनीति के साथ जोड़कर ही स्थायी सुधार हासिल किया जा सकता है। तभी भारत की डिजिटल यात्रा सिर्फ शोभा नहीं, बल्कि वास्तविक सामाजिक प्रगति का मार्ग बन पाएगी।

Published: May 7, 2026