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Category: समाज

200 वर्गफ़ुट के छोटे घर में दुगुना स्थान का अहसास: डिज़ाइन‑ट्रिक्स और आवास नीति की गिरती छाया

बङे‑बङे शहरी पहलुओं में, जहाँ अपार्टमेंट कोड रेट 1‑2 लाख रुपये पर वर्गमीटर पहुँच चुके हैं, कई परिवार अब 200 वर्गफ़ुट से कम में ही अपना आश्रय बसा रहे हैं। यह मात्र आकृति‑विज्ञान नहीं, बल्कि भारत की किफायती आवास नीति की गहरी असफलता का प्रतिबिंब है।

डिज़ाइन विशेषज्ञों के अनुसार, खुले दृश्य, परतदार प्रकाश, बहु‑उपयोगी फ़र्नीचर और ऊँची दीवारों पर रंग‑क्रमविन्यास जैसी छोटी‑छोटी तकनीकें इन छोटे किलों को दो गुना बड़ा महसूस करा सकती हैं। विद्युतीकरण के कई नॉन‑इंस्टालेशन और अल्मारी‑को-डेस्क की बौछार, एक तरह का सामुदायिक‑संकल्प बन गया है—जैसे कि सार्वजनिक कक्ष में भी “स्मार्ट” शब्द को बढ़ा‑चढ़ाकर पेश किया जाता है, जबकि वास्तविक भू‑विकास में जगह नहीं मिलती।

वास्तव में, इन उपायों की सफलता केवल तब ही अर्थपूर्ण होती है जब उन लोगों को उचित मात्रा में जगह मिले, न कि उन्हें 3 मे लेटर‑बॉक्स में फर्नीचर‑फ़िट करने के लिये मजबूर किया जाए। कई नगरपालिका योजनाएँ “प्रत्येक परिवार को 250 वर्गफ़ुट” का वादा करती हैं, पर अस्तित्व में ऐसे “वादा” केवल कागज़ पर ही चमकते हैं। परिणामस्वरूप, घर‑सड़कों पर ‘कीट‑पैदल‑इन्फ्रास्ट्रक्चर’ की बातें होते‑होते लोग खुद को ‘अभी भी कमरा नहीं मिला’ की श्रेणी में पाते हैं।

सही‑दरशिया वास्तुकार इस बात पर इशारा करते हैं कि “डिक्लटरिंग” (अवांछित वस्तुओं का हटाना) एक व्यक्तिगत मिशन नहीं, बल्कि सार्वजनिक‑सेवा की पहली कड़ी होनी चाहिए। सफ़ाई कर्मचारी, सौंपे‑गए ‘साइकल‑वॉल्ट’ (सायकिल स्टैंड) और काउंटी‑लेवल “वैकल्पिक जमीन” के अभाव में, लोग अनजाने में अपने जीवन को छोटे‑छोटे बॉक्स में सीमित कर रहे हैं।

इन परिस्थितियों में, जिस तरह प्रशासन ने ‘आवास योजना’ के नाम से ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ कहा, पर वास्तव में ‘हाउसिंग फॉर नॉन‑ऑल’ की ही कसम खाई, वह एक व्यंग्य बन चुका है। यदि नीति निर्माताओं ने वास्तव में ‘जिलों को हटाने’ के बजाय ‘आवश्यक ज़मीन को जोड़ने’ पर ध्यान दिया, तो न केवल डिज़ाइन‑ट्रिक्स की जरूरत कम होती, बल्कि सामाजिक असमानताएँ भी घटती।

अंततः, 200 वर्गफ़ुट के छोटे घर को दो गुना बड़ा महसूस कराने के उपाय निःसंशय रूप से सराहनीय हैं—पर ये ऐसे उपाय तभी असली बदलाव बनेंगे, जब सरकार अपने ‘स्थान‑सुधार’ के बजाए ‘स्थान‑सृजन’ पर निवेश करे। तभी हर गृहिणी को फर्नीचर‑डेस्क नहीं, बल्कि एक साँची‑सुरक्षित घर मिलेगा।

Published: May 4, 2026